Monday, 16 November 2020

हिन्दू धर्म (hindu religion)



१) चारवेद 
रचयिता ;- वेदव्यास 

२) १०८ उपनिषद 
रचियता ;- वेदव्यास 
उपलब्ध उपनिषद-ग्रन्थों की संख्या में से ईशादि 10 उपनिषद सर्वमान्य हैं। उपनिषदों की कुल संख्या 108 है। प्रमुख उपनिषद हैं- ईश , केन , कठ , माण्डूक्य , तैत्तिरीय , ऐतरेय , छान्दोग्य , श्वेताश्वतर , बृहदारण्यक , कौषीतकि , मुण्डक , प्रश्न , मैत्राणीय आदि।


३)१८ पुराण (ग्रन्थ)
रचियता ;- वेदव्यास जी 



४) ४ संहिता जो वेदो के मन्त्र है | 
५) पांच प्रकार के यज्ञ ;- 

१)ब्रम्ह यज्ञ , २) देवयज्ञ ३ )पितृयज्ञ ४ )भूत यज्ञ ५)अतिथि यज्ञ 
५) १६ संस्कार 


६) दो प्रमुख महाकाव्य 

रचयिता ;- वाल्मीकि और वेदव्यास 
७) दो महापर्व ;-होली , दिवाली 

८) द्वादश 12  ज्योतिर्लिंग 


९) ५२ शक्तिपीठ 



देवी भागवत पुराण में 108, कालिकापुराण में छब्बीस, शिवचरित्र में इक्यावन, दुर्गा शप्तसती और तंत्रचूड़ामणि में शक्ति पीठों की संख्या 52 बताई गई है।

साधारत: 51 शक्ति पीठ माने जाते हैं। तंत्रचूड़ामणि में लगभग 52 शक्ति पीठों के बारे में बताया गया है। प्रस्तुत है तंत्रचूड़ामणि की तालिका।



1.हिंगला
हिंगुला या जो कराची से 125 किमी उत्तर पूर्व में स्थित है, जहाँ माता का ब्रह्मरंध (सिर) गिरा था। इसकी शक्ति- कोटरी (भैरवी-कोट्टवीशा) है और भैरव को भीमलोचन कहते हैं।

2.शर्कररे (करवीर)
पाकिस्तान में कराची के सुक्कर स्टेशन के निकट स्थित है शर्कररे शक्तिपीठ, जहाँ माता की आँख गिरी थी। इसकी शक्ति- महिषासुरमर्दिनी और भैरव को क्रोधिश कहते हैं।

3.सुगंधा- सुनंद
बांग्लादेश के शिकारपुर में बरिसल से 20 किमी दूर सोंध नदी के किनारे स्थित है माँ सुगंध, जहाँ माता की नासिका गिरी थी। इसकी शक्ति है सुनंदा और भैरव को त्र्यंबक कहते हैं।

4.कश्मीर- महामाय
भारत के कश्मीर में पहलगाँव के निकट माता का कंठ गिरा था। इसकी शक्ति है महामाया और भैरव को त्रिसंध्येश्वर कहते हैं।

5.ज्वालामुखी- सिद्धिदा (अंबिका)
भारत के हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा में माता की जीभ गिरी थी, उसे ज्वालाजी स्थान कहते हैं। इसकी शक्ति है सिद्धिदा (अंबिका) और भैरव को उन्मत्त कहते हैं।

6.जालंधर- त्रिपुरमालिन
पंजाब के जालंधर में छावनी स्टेशन के निकट देवी तलाब जहाँ माता का बायाँ वक्ष (स्तन) गिरा था। इसकी शक्ति है त्रिपुरमालिनी और भैरव को भीषण कहते हैं।

7.वैद्यनाथ- जयदुर्ग
झारखंड के देवघर में स्थित वैद्यनाथधाम जहाँ माता का हृदय गिरा था। इसकी शक्ति है जय दुर्गा और भैरव को वैद्यनाथ कहते हैं।

8.नेपाल- महामाय
नेपाल में पशुपतिनाथ मंदिर के निकट स्‍थित है गुजरेश्वरी मंदिर जहाँ माता के दोनों घुटने (जानु) गिरे थे। इसकी शक्ति है महशिरा (महामाया) और भैरव को कपाली कहते हैं।

9.मानस- दाक्षायण
तिब्बत स्थित कैलाश मानसरोवर के मानसा के निकट एक पाषाण शिला पर माता का दायाँ हाथ गिरा था। इसकी शक्ति है दाक्षायनी और भैरव अमर हैं।

10.विरजा- विरजाक्षेत्
भारतीय प्रदेश उड़ीसा के विराज में उत्कल स्थित जगह पर माता की नाभि गिरी थी। इसकी शक्ति है विमला और भैरव को जगन्नाथ कहते हैं।

11.गंडकी- गंडक
नेपाल में गंडकी नदी के तट पर पोखरा नामक स्थान पर स्थित मुक्तिनाथ मंदिर, जहाँ माता का मस्तक या गंडस्थल अर्थात कनपटी गिरी थी। इसकी शक्ति है गण्डकी चण्डी और भैरव चक्रपाणि हैं।

12.बहुला- बहुला (चंडिका)
भारतीय प्रदेश पश्चिम बंगाल से वर्धमान जिला से 8 किमी दूर कटुआ केतुग्राम के निकट अजेय नदी तट पर स्थित बाहुल स्थान पर माता का बायाँ हाथ गिरा था। इसकी शक्ति है देवी बाहुला और भैरव को भीरुक कहते हैं।

13.उज्जयिनी- मांगल्य चंडिक
भारतीय प्रदेश पश्चिम बंगाल में वर्धमान जिले से 16 किमी गुस्कुर स्टेशन से उज्जय‍िनी नामक स्थान पर माता की दायीं कलाई गिरी थी। इसकी शक्ति है मंगल चंद्रिका और भैरव को कपिलांबर कहते हैं।

14.त्रिपुरा- त्रिपुर सुंदर
भारतीय राज्य त्रिपुरा के उदरपुर के निकट राधाकिशोरपुर गाँव के माताबाढ़ी पर्वत शिखर पर माता का दायाँ पैर गिरा था। इसकी शक्ति है त्रिपुर सुंदरी और भैरव को त्रिपुरेश कहते हैं।

15.चट्टल - भवान
बांग्लादेश में चिट्टागौंग (चटगाँव) जिला के सीताकुंड स्टेशन के निकट ‍चंद्रनाथ पर्वत शिखर पर छत्राल (चट्टल या चहल) में माता की दायीं भुजा गिरी थी। इसकी शक्ति भवानी है और भैरव को चंद्रशेखर कहते हैं।

16.त्रिस्रोता- भ्रामर
भारतीय राज्य पश्चिम बंगाल के जलपाइगुड़ी के बोडा मंडल के सालबाढ़ी ग्राम स्‍थित त्रिस्रोत स्थान पर माता का बायाँ पैर गिरा था। इसकी शक्ति है भ्रामरी और भैरव को अंबर और भैरवेश्वर कहते हैं।

17.कामगिरि- कामाख्‍य
भारतीय राज्य असम के गुवाहाटी जिले के कामगिरि क्षेत्र में स्‍थित नीलांचल पर्वत के कामाख्या स्थान पर माता का योनि भाग गिरा था। इसकी शक्ति है कामाख्या और भैरव को उमानंद कहते हैं।

18.प्रयाग- ललित
भारतीय राज्य उत्तरप्रदेश के इलाहबाद शहर (प्रयाग) के संगम तट पर माता की हाथ की अँगुली गिरी थी। इसकी शक्ति है ललिता और भैरव को भव कहते हैं।

19.जयंती- जयंत
बांग्लादेश के सिल्हैट जिले के जयंतीया परगना के भोरभोग गाँव कालाजोर के खासी पर्वत पर जयंती मंदिर जहाँ माता की बायीं जंघा गिरी थी। इसकी शक्ति है जयंती और भैरव को क्रमदीश्वर कहते हैं।

20.युगाद्या- भूतधात्र
पश्चिम बंगाल के वर्धमान जिले के खीरग्राम स्थित जुगाड्‍या (युगाद्या) स्थान पर माता के दाएँ पैर का अँगूठा गिरा था। इसकी शक्ति है भूतधात्री और भैरव को क्षीर खंडक कहते हैं।

21.कालीपीठ- कालिक
कोलकाता के कालीघाट में माता के बाएँ पैर का अँगूठा गिरा था। इसकी शक्ति है कालिका और भैरव को नकुशील कहते हैं।

22.किरीट- विमला (भुवनेशी)
पश्चिम बंगाल के मुर्शीदाबाद जिला के लालबाग कोर्ट रोड स्टेशन के किरीटकोण ग्राम के पास माता का मुकुट गिरा था। इसकी शक्ति है विमला और भैरव को संवर्त्त कहते हैं।

23.वाराणसी- विशालाक्षी उत्तरप्रदेश के काशी में मणि‍कर्णिक घाट पर माता के कान के मणिजड़ीत कुंडल गिरे थे। इसकी शक्ति है विशालाक्षी‍ मणिकर्णी और भैरव को काल भैरव कहते हैं

24.कन्याश्रम- सर्वाण
कन्याश्रम में माता का पृष्ठ भाग गिरा था। इसकी शक्ति है सर्वाणी और भैरव को निमिष कहते हैं

25.कुरुक्षेत्र- सावित्र
हरियाणा के कुरुक्षेत्र में माता की एड़ी (गुल्फ) गिरी थी। इसकी शक्ति है सावित्री और भैरव है स्थाणु।

26.मणिदेविक- गायत्र
अजमेर के निकट पुष्कर के मणिबन्ध स्थान के गायत्री पर्वत पर दो मणिबंध गिरे थे। इसकी शक्ति है गायत्री और भैरव को सर्वानंद कहते हैं।
27.श्रीशैल- महालक्ष्म
बांग्लादेश के सिल्हैट जिले के उत्तर-पूर्व में जैनपुर गाँव के पास शैल नामक स्थान पर माता का गला (ग्रीवा) गिरा था। इसकी शक्ति है महालक्ष्मी और भैरव को शम्बरानंद कहते हैं।

28.कांची- देवगर्भ
पश्चिम बंगाल के बीरभुम जिला के बोलारपुर स्टेशन के उत्तर पूर्व स्थित कोपई नदी तट पर कांची नामक स्थान पर माता की अस्थि गिरी थी। इसकी शक्ति है देवगर्भा और भैरव को रुरु कहते हैं।
29.कालमाधव- देवी काल
मध्यप्रदेश के अमरकंटक के कालमाधव स्थित शोन नदी तट के पास माता का बायाँ नितंब गिरा था जहाँ एक गुफा है। इसकी शक्ति है काली और भैरव को असितांग कहते हैं।

30.शोणदेश- नर्मदा (शोणाक्षी)
मध्यप्रदेश के अमरकंटक स्थित नर्मदा के उद्गम पर शोणदेश स्थान पर माता का दायाँ नितंब गिरा था। इसकी शक्ति है नर्मदा और भैरव को भद्रसेन कहते हैं।
31.रामगिरि- शिवान
उत्तरप्रदेश के झाँसी-मणिकपुर रेलवे स्टेशन चित्रकूट के पास रामगिरि स्थान पर माता का दायाँ वक्ष गिरा था। इसकी शक्ति है शिवानी और भैरव को चंड कहते हैं।

32.वृंदावन- उम
उत्तरप्रदेश के मथुरा के निकट वृंदावन के भूतेश्वर स्थान पर माता के गुच्छ और चूड़ामणि गिरे थे। इसकी शक्ति है उमा और भैरव को भूतेश कहते हैं।
33.शुचि- नारायण
तमिलनाडु के कन्याकुमारी-तिरुवनंतपुरम मार्ग पर शुचितीर्थम शिव मंदिर है, जहाँ पर माता की ऊपरी दंत (ऊर्ध्वदंत) गिरे थे। इसकी शक्ति है नारायणी और भैरव को संहार कहते हैं।

34.पंचसागर- वाराह
पंचसागर (अज्ञात स्थान) में माता की निचले दंत (अधोदंत) गिरे थे। इसकी शक्ति है वराही और भैरव को महारुद्र कहते हैं।
35.करतोयातट- अपर्ण
बांग्लादेश के शेरपुर बागुरा स्टेशन से 28 किमी दूर भवानीपुर गाँव के पार करतोया तट स्थान पर माता की पायल (तल्प) गिरी थी। इसकी शक्ति है अर्पण और भैरव को वामन कहते हैं।

36.श्रीपर्वत- श्रीसुंदर
कश्मीर के लद्दाख क्षेत्र के पर्वत पर माता के दाएँ पैर की पायल गिरी थी। दूसरी मान्यता अनुसार आंध्रप्रदेश के कुर्नूल जिले के श्रीशैलम स्थान पर दक्षिण गुल्फ अर्थात दाएँ पैर की एड़ी गिरी थी। इसकी शक्ति है श्रीसुंदरी और भैरव को सुंदरानंद कहते हैं।
37.विभाष- कपालिन
पश्चिम बंगाल के जिला पूर्वी मेदिनीपुर के पास तामलुक स्थित विभाष स्थान पर माता की बायीं एड़ी गिरी थी। इसकी शक्ति है कपालिनी (भीमरूप) और भैरव को शर्वानंद कहते हैं।

38.प्रभास- चंद्रभाग
गुजरात के जूनागढ़ जिले में स्थित सोमनाथ मंदिर के निकट वेरावल स्टेशन से 4 किमी प्रभास क्षेत्र में माता का उदर गिरा था। इसकी शक्ति है चंद्रभागा और भैरव को वक्रतुंड कहते हैं।
39.भैरवपर्वत- अवंत
मध्यप्रदेश के ‍उज्जैन नगर में शिप्रा नदी के तट के पास भैरव पर्वत पर माता के ओष्ठ गिरे थे। इसकी शक्ति है अवंति और भैरव को लम्बकर्ण कहते हैं।

40.जनस्थान- भ्रामर
महाराष्ट्र के नासिक नगर स्थित गोदावरी नदी घाटी स्थित जनस्थान पर माता की ठोड़ी गिरी थी। इसकी शक्ति है भ्रामरी और भैरव है विकृताक्ष।
41.सर्वशैल स्था
आंध्रप्रदेश के राजामुंद्री क्षेत्र स्थित गोदावरी नदी के तट पर कोटिलिंगेश्वर मंदिर के पास सर्वशैल स्थान पर माता के वाम गंड (गाल) गिरे थे। इसकी शक्ति है रा‍किनी और भैरव को वत्सनाभम कहते हैं'

42.गोदावरीतीर :
यहाँ माता के दक्षिण गंड गिरे थे। इसकी शक्ति है विश्वेश्वरी और भैरव को दंडपाणि कहते हैं।
43.रत्नावली- कुमार
बंगाल के हुगली जिले के खानाकुल-कृष्णानगर मार्ग पर रत्नावली स्थित रत्नाकर नदी के तट पर माता का दायाँ स्कंध गिरा था। इसकी शक्ति है कुमारी और भैरव को शिव कहते हैं।

44.मिथिला- उमा (महादेवी)
भारत-नेपाल सीमा पर जनकपुर रेलवे स्टेशन के निकट मिथिला में माता का बायाँ स्कंध गिरा था। इसकी शक्ति है उमा और भैरव को महोदर कहते हैं।
45.नलहाटी- कालिका तारापी
पश्चिम बंगाल के वीरभूम जिले के नलहाटि स्टेशन के निकट नलहाटी में माता के पैर की हड्डी गिरी थी। इसकी शक्ति है कालिका देवी और भैरव को योगेश कहते हैं।

46.कर्णाट- जयदुर्ग
कर्नाट (अज्ञात स्थान) में माता के दोनों कान गिरे थे। इसकी शक्ति है जयदुर्गा और भैरव को अभिरु कहते हैं।
47.वक्रेश्वर- महिषमर्दिन
पश्चिम बंगाल के वीरभूम जिले के दुबराजपुर स्टेशन से सात किमी दूर वक्रेश्वर में पापहर नदी के तट पर माता का भ्रूमध्य (मन:) गिरा था। इसकी शक्ति है महिषमर्दिनी और भैरव को वक्रनाथ कहते हैं।

48.यशोर- यशोरेश्वर
बांग्लादेश के खुलना जिला के ईश्वरीपुर के यशोर स्थान पर माता के हाथ और पैर गिरे (पाणिपद्म) थे। इसकी शक्ति है यशोरेश्वरी और भैरव को चण्ड कहते हैं।
49.अट्टाहास- फुल्लर
पश्चिम बंगला के लाभपुर स्टेशन से दो किमी दूर अट्टहास स्थान पर माता के ओष्ठ गिरे थे। इसकी शक्ति है फुल्लरा और भैरव को विश्वेश कहते हैं।

50.नंदीपूर- नंदिन
पश्चिम बंगाल के वीरभूम जिले के सैंथिया रेलवे स्टेशन नंदीपुर स्थित चारदीवारी में बरगद के वृक्ष के समीप माता का गले का हार गिरा था। इसकी शक्ति है नंदिनी और भैरव को नंदिकेश्वर कहते हैं।
51.लंका- इंद्राक्ष
श्रीलंका में संभवत: त्रिंकोमाली में माता की पायल गिरी थी (त्रिंकोमाली में प्रसिद्ध त्रिकोणेश्वर मंदिर के निकट)। इसकी शक्ति है इंद्राक्षी और भैरव को राक्षसेश्वर कहते हैं।

52.विराट- अंबिक
विराट (अज्ञात स्थान) में पैर की अँगुली गिरी थी। इसकी शक्ति है अंबिका और भैरव को अमृत कहते हैं।
नोट : इसके अलावा पटना-गया के इलाके में कहीं मगध माना जाता है....

53. मगध- सर्वानन्दकर
मगध में दाएँ पैर की जंघा गिरी थी। इसकी शक्ति है सर्वानंदकरी और भैरव को व्योमकेश कहते हैं।

१०) चार पुरुषार्थ 






लेखक ;- संकलनकर्ता ____रविकांत यादव  for more click ;-http://justiceleague-justice.blogspot.com/



Wednesday, 28 October 2020

कुमार सानु के गाने ( part 2 ) (melody man )


प्रस्तुत है , कुमार सानु जी के चुनिंदा गाने जिन्हे आप फिल्म के नाम से webmusic.in  से या बोल अनुसार mp3mad .com से या google से या youtube.com से mp3 में download कर सुन सकते है | 


१) ऊपर वाला अपने साथ है | ( सिर्फ तुम )

२) पूछो जरा पूछो ( राजा हिंदुस्तानी )

३) साची कहो हमसे तुमको कितना ( साजन की बाहो में )

४) दिल की तन्हाई को आवाज़ ( चाहत )

५) इस प्यार से मेरी तरफ न देखो ( चमत्कार )

६) यू ही कट जायेगा सफर साथ चलने से ( हम है राही प्यार के )

७) आप के करीब हम रहते है ( साजन की बाहो में )



८) कभी जो भूलना चाहु  (नसीब) 

९) दीवाना मै तेरा दीवाना ( इंग्लिश बाबू देसी मेम )

१०) तेरी मुहब्बत ने दिल में (रंग )

११) साथिया बिन तेरे दिल माने ना ( हिम्मत )

१२) आज पहली बार दिल की बात की है (तड़ीपार )

१३)  मेरा तोहफा तू कर ले कबूल (धरतीपुत्र )

१४) ठहरे हुए पानी में (male ) ( दलाल )

१५) कुछ ना कहो (1942 a love story )

१६) आँख है भरी भरी (  तुमसे अच्छा कौन है )

१७) मै दुनिया  भुला दुगा (आशिक़ी) 

१८) हर दिल में है रब बसता ( सबसे बड़ा खिलाडी ) 

१९) सावरी सलोनी तेरी झिली सी आँखे (हम सब चोर है )

२०) तुमसे कोई प्यारा कोई मासूम (खुद्दार )

२१ ) तारे है बाराती चांदनी है (विरासत )

२२) कितना हसीन चेहरा कितनी प्यारी आँखे ( दिलवाले )

२३) तुमसे क्या चोरी है ( हम है बेमिसाल )

२४) रोने न दीजियेगा तो गाया (जान तेरे नाम )

२५) ये जो थोड़े से है पैसे ( पापा कहते है )


लेखक ;-प्रस्तुत कर्ता - रविकान्त यादव for more click ;-http://justiceleague-justice.blogspot.com/

कोरोना का उपचार (treatment of corona )



कोरोना का साधारणतः प्रमुख लक्षण है ;- बुखार , सुखी खाँसी , और थकान | 

वैसे तो  आयुर्वेद में कोरोना का इलाज आयुर्वेदिक काढ़ा है , जिसमे तुलसी ,गिलोय व अश्वगंधा का मेल होना चाहिए | व  अदरक नीबू की चाय पिए | 




परन्तु होमियोपैथी में इसका सटीक और कारगर इलाज मौजूद है | 

जिन्हे आप बताये अनुसार किसी होमियोपैथी के दुकान से खरीद  सकते है | 


१) सर्दी जुखाम , खासी जकड़न के लिए ;- kali bichromicum 30 ch ( ३० ch दवा की potency ताकत मापने का पैमाना है , जिसे आप घटा बढ़ा सकते है ) 


२) बुखार के लिए aconitum napellus 30 ch है | 


३) थकान दर्द चोट के लिए arnica montana 30 ch है | 

इस दवा से प्रतिरक्षा तंत्र immune system  भी मजबूत होता है | 


४) एक दवा जो महामारी को देखते हुए immune booster है , उसका नाम arsenic album 30 ch है | 

इन दवा को लेने से कोरोना   कुछ हद तक नहीं होगा , और है,तो ठीक हो जायेगा ,

इन चारो दवा को आप जीभ पर 5  से 10  बूँद सुबह ,दोपहर , शाम ,  रात को जीभ पर टपकाये 


जैसे सुबह एक दवा ले दोपहर एक दवा शाम रात एक दवा ले 5 से 10 बूँद जीभ  पर टपकाये या जरुरत अनुसार ले सकते है | समस्या गंभीर  पर इन दवा को  आप बार बार ले सकते है | जैसे दोहरा या तीहरा ले सकते है | मेरे लेख  से असहमत होने पर  आप इन दवा को google पर खोज व सहमत हो सकते है | 


लेखक ;- होमियोपैथी दवा का हेल्थ communicator ____ रविकान्त  यादव  for more click me ;-http://justiceleague-justice.blogspot.com/


Saturday, 29 December 2018

काम की वेबसाइटे (very important application and website for your android)


१) vidmate यह एक वीडियो व गानो को डाउनलोड करने का application है | इसे आप दिए लिंक से डाउनलोड कर सकते है , लिंक को google address bar में copy paste करे व enter के बाद सबसे ऊपर वाली वेबसाइट क्लिक करे ;- https://www.vidmate.ind.in/





२) avd  यह भी वीडियो downloader है , इसे आप अपने playstore  से डाउनलोड कर सकते है | 





३) snaptube  यह भी वीडियो एंड mp3  downloader है | लिंक है ;- https://www.snaptubeapp.com/





४) सभी प्रकार के जॉब (नौकरी ) सम्बंधित विद्यार्थियों के लिए sarkariresult.com इसे आप अपने playstore से भी डाउनलोड कर सकते है |  लिंक है ;- https://www.sarkariresult.com/





५) हर प्रकार के वीडियो को सपोर्ट या देखने के लिए vlc मीडिया प्लेयर आप अपने play store से डाउनलोड कर सकते है | लिंक ;- https://www.videolan.org/vlc/download-windows.html




६) भारतीय रेल टिकट के लिए irctc इसे आप अपने playstore से डाउनलोड कर सकते है | लिंक है ;- https://www.irctc.co.in/nget/train-search







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८) virus cleaner 2019 यह एक एंटीवायरस है , इसे आप अपने मोबाइल के प्लेस्टोर से डाउनलोड कर सकते है |  लिंक है ;- https://play.google.com/store/apps/details?id=com.rocket.tools.clean.antivirus.master&hl=en_IN


९) panda cloud antivirus यह एंटीवायरस सर्वर से आपकी कंप्यूटर की रक्षा करेगा इसे आप अपने प्लेस्टोर से भी डाउनलोड कर सकते है | लिंक है ;- https://www.pandasecurity.com/india/homeusers/solutions/free-antivirus/

१०) 360totalsecurity.com  इस  एंटीवायरस को भी आप अपने playstore से download कर सकते है | 
कंप्यूटर के लिए लिंक है ;- https://www.360totalsecurity.com/en/

नोट ;-एक बार में एक ही antivirus अपने कंप्यूटर में install करे 

११) हिंदी की सबसे पहली लोकप्रिय वेबसाइट webduniya.com इसे आप अपने play store से भी डाउनलोड कर सकते है |  लिंक है ;- http://hindi.webdunia.com/





१२) स्वास्थ्य व उपचार हेतु  onlymyhealth.com  इसे आप अपने playstore से भी डाउनलोड कर सकते है, इसके menu पर क्लिक करे  , | लिंक है ;- https://www.onlymyhealth.com/hindi.html

१३) बोल अनुसार गानो को डाउनलोड हेतु ;-लिंक है ;- https://mymp3mad.com/

१४) फिल्मो के नाम अनुसार गानो को डाउनलोड करने हेतु webmusic.in ;- लिंक है ;-http://webmusic.live/




१५) नयी फिल्मो को देखने और डाउनलोड करने हेतु bollyshares.com लिंक है ;- https://bollyshares.com/

१६) गूगल की तरह दमदार search engine है bing लिंक है ;- https://www.bing.com/

१८) अन्य तमाम फाइल डाउनलोड करने के लिए filehippo.com , लिंक है ;- https://filehippo.com/

१९) chrome एंड firefox दो दमदार वेब ब्राउज़र इन्हे आप प्ले स्टोर से डाउनलोड कर सकते है ;- लिंक है ;-https://www.google.com/intl/en_in/chrome/

२०) न्यूज़ हेतु dailyhunt इसे आप अपने playstore से डाउनलोड कर सकते है | लिंक है ;- http://www.dailyhunt.in/

२१) क्रिकेट हेतु crickbuzz आप अपने प्ले स्टोर से डाउनलोड कर सकते है | लिंक है ;- https://www.cricbuzz.com/cricket-match/live-scores

२२) तेज़ी से एंड्राइड से फाइल ट्रांसफर हेतु ऑडियो वीडियो आदि हेतु shareit इसे आप अपने प्लेस्टोर से डाउनलोड कर सकते है | लिंक है ;-https://play.google.com/store/apps/details?id=com.lenovo.anyshare.gps&hl=en_IN




२३) आप अपने फोन में   *#०६# लिखे तुरंत IMEI नंबर आएगा जिसे आप नोट  कर ले फोन खो जाने पर इसे आप service center या कंपनी में  रसीद सहित देने से आप का फोन बंद कर दिया जायेगा तथा उसे trace भी किया जा सकता है |  वही आप गूगल में device manager लिखे तब find my device google आ जायेगा यही आप अपने playstore से भी device manager डाउनलोड कर सकते है | google email प्लेस्टोर में बाए तरफ ऊपर दिखेगा इससे अपने फोन को चोरी हो जाने पर घर बैठे अपने फोन को लॉक करे या find करे या अपने फोन का सब कुछ erase कर सकते है | यही कार्य google find my device app को भी अपने play store से डाउनलोड करे तब सारे process  करे |  दोनों तरफ ऑनलाइन होना जरुरी है | लिंक है ;- गूगल में find my device google account  लिखे || 


लेखक;- संकलनकर्ता_______रविकान्त यादव for more click me ;-http://justiceleague-justice.blogspot.com/ and  https://www.facebook.com/ravikantyadava







Wednesday, 28 November 2018

अपराजिता (the invincible)


अभी तक नारी को कोई जीत नहीं सका है ,चाहे वह राम हो या रावण , कंस हो या कृष्ण , महिसासुर हो या महाकाल सभी नारीया सत्ता , सामर्थ्य ,शक्ति की ताक़त से ऊपर ही है | 

नारी को भोग विलास , शोषण व सेविका समझने वाले महिसासुर की तरह मर्दन करने योग्य ही होते है | 




एक महिला पृथ्वी के सामान ९ महीने का भार उठाकर एक पुरुष या महिला को जन्म देती है | पुरुष का तो पता नहीं पर महिला को हम अपराजिता जरूर कहेगे | 




ये सती , सावित्री, अनसुइया  जैसी साधारण महिलाये ही है, जो ब्रह्माण्ड की सारी शक्तियों को अधीन कर लेती है | फिर भी हम किसी महिला को सम्मान नहीं दे सकते तो धरती पर उसकी उपस्थिति शर्मनाक है | 


लेखक;- सम्मान के साथ ____रविकान्त यादव for more click me ;-http://justiceleague-justice.blogspot.com/ and https://www.facebook.com/ravikantyadava





शिव (lord of time )


ॐ नमः शिवाय 
भगवान शिव के १०8  नाम है , प्रमुख १० नाम  १) शिव - जिसका अर्थ है =कल्याण स्वरुप २)महेश्वर = माया के अधीश्वर ३) शम्भू -आनंद स्वरुप वाले ४)पिनाकी- पिनाक धनुष धारण करने वाले ५)शशिशेखर = सिरपर चन्द्रमा धारण करने वाले  ६) वामदेव - अत्यंत सुन्दर स्वरुप वाले  ७) विरुपाक्ष - विचित्र आंखवाले त्रिनेत्रधारी ८)कपर्दी - जटाजूट धारण करने वाले  ९) नीललोहित - नीले  और लाल रंग वाले  १०) शंकर - सबका कल्याण करने वाले | 
भगवान शिव को स्वयंभू कहा गया है , अर्थात जिसका अर्थ है , वह अजन्मा है , एक बार शिव अमृत पान की लालसा ही नहीं लिए हुए अमृत लेकर जब अपने जंघा पर मलते है, तो विष्णु का जन्म हुआ बाद में विष्णु के नाभि कमल से ब्रम्हा उत्पन्न हुए | 




शिव का न आदि है न अंत है , जो अजन्मा अविनाशी है | शिव महाकाल है अर्थात कालो के काल मृत्यु के भी देवता ,जो भूत ,भविष्य ,  वर्तमान  पर नियंत्रण रखते है , | काल यात्रा कर सकते है , अर्थात त्रिकाल दर्शी है , भूत, भविष्य , वर्तमान को जानने वाले है , व  बदलने वाले भी शिव है , इनका त्रिसूल तीनो कालो का सूचक है | 
जो जीवन मृत्यु से परे है , जो काल समय से परे है ,वो शिव है | 



महादेव है ,अर्थात देवो के भी देव है , राम से लेकर रावण तक इनके उपासक है |  देव दानव मानव सभी इनकी आराधना करते है , | शिव सभी के है , देव , दानव , मानव, भूत,प्रेत, यक्ष , गन्धर्व, नाग, किन्नर , सभी शिव कृपा पात्र है , शिव सभी के है | 




एक तरफ बालक मार्कण्डेय की मृत्यु जन्म के साथ  निर्धारित  करते है , दूसरी तरफ जब उनकी मृत्यु आती है तब न केवल मृत्यु से उनकी रक्षा करते है , वरन अमरता का वरदान भी प्रदान करते है |



 शिव ही आदि है तो अंत भी है , अर्थात जिसका न तो आदि है न अंत  , ब्रह्माण्ड की सारी  शक्तिया शिव के अधीन है , शिव त्रिलोकी नाथ है , शिव गुरुवो के भी गुरु है , समुद्र मंथन से सभी को सुख , सफलता , सम्पन्नता , ऐश्वर्य, धन, वैभव, अमरता आदि की कामना थी , परन्तु शिव को कुछ नहीं चाहिए , शिव बैरागी है , उल्टे  उन्होंने लोक कल्याण हेतु हलाहल विष का ही पान कर लिया 




तो दूसरी तरफ तपस्या में बाधा  पहुंचाने  पर कामदेव को ही जला कर भस्म कर  देते है  | शिव आज भी गुरु है , सारी शक्तिया शिव से ही है , अतः उस आशुतोष जो तुरंत प्रसन्न होते है | विष्णु को सुदर्शन चक्र , परशुराम को अजेय दिव्य परशु , इंद्र को पिनाक धनुष , तथा सर्वश्रेष्ठ धनुर्धर अर्जुन को पाशुपास्त्र प्रदान करते है | 





ऐसे महादेव भोलेनाथ की हम आराधना करते है | 
 करपूर गौरम करूणावतारम. संसार सारम भुजगेन्द्र हारम |. सदा वसंतम हृदयारविंदे. भवम भवानी सहितं नमामि ||


   लेखक;-शिव भक्त ___रविकान्त यादव  for more click me ;-
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रुद्राक्ष (divine garland)

१)रुद्राक्ष की उत्पत्ति ;- भगवान  शिव संसार के कल्याण के लिए कई वर्षो तक तप करते है | लेकिन लोगो के कष्ट देखकर उनका मन दुखी हो गया , जब शिव जी ने अपने नेत्र खोले तो उनकी आँखों से कुछ आँसू जमींन  पर गिरे , जहा जहा उनके आंसू गिरे  वहा वहा रुद्राक्ष के वृक्ष उत्पन्न हुए , एक अन्य कथा अनुसार जब भगवान शिव त्रिपुर नामक असुर के वध के लिए अघोर अस्त्र का चिंतन किया तब उनके नेत्र से आंसुओ की कुछ बुँदे धरती पर गिरी यही जिनसे रुद्राक्ष वृक्ष की उत्पत्ति हुई | 



रुद्राक्ष रूद्र और अक्ष से मिलकर बना है , इसका अर्थ है रूद्र अर्थात शिव के आंसू , रुद्राक्ष एक प्रकार के फल का बीज होता है , फल के छिलके को हटाकर बीज को गले में धारण किया जाता है , रुद्राक्ष एक मुख से होकर १४ मुखी तक होता है , सभी के अपने अपने गुण है | परन्तु एकमुखी रुद्राक्ष दुर्लभ और सबसे फलदायी माना जाता है | इसे शिव का स्वरुप माना जाता है , रुद्राक्ष का पेंड हिमालय क्षेत्र में और असम , उत्तराँचल के जंगलो में , इसके साथ नेपाल , मलेशिया व इण्डोनेशिया  में काफी मात्रा में पाए जाते है , नेपाल व इंडोनेशिया से इसका सबसे अधिक निर्यात भारत में होता है | 





२) रुद्राक्ष के गुण ;- रुद्राक्ष को गंगाजल से शुद्ध कर शिवलिंग या शिव प्रतिमा से स्पर्श करा धारण करना चाहिए , रुद्राक्ष धारण करने वालो को शुद्ध सात्विक रहना होता है , अंडा , मांस मदिरा से दूर रहना चाहिए , रात में सोते समय व नहाते आदि समय इसे निकाल देना चाहिए , इसे धारण करने से सकारात्मक ऊर्जा की प्राप्ति होती है , और शिव कृपा होती है , रुद्राक्ष धारण करने से भूत-प्रेत और ग्रह बाधा  दूर होती है | रुद्राक्ष हमेशा हृदय के पास धारण करना चाहिए इससे हृदय रोग , हृदय कम्पन , ब्लड प्रेशर , आदि रोगो में आराम मिलता है , व पापो का नाश होता है | 


रक्त संचार सुचारु रहता है , व इसके चुम्बकीय क्षेत्र से शरीर को ऊर्जा मिलती है | एक से लेकर १४ मुखी तक रुद्राक्ष धारण करने से अलग अलग गुण व दैवीय शक्तिया भी मिलती है | रुद्राक्ष की महिमा का वर्णन शिव पुराण , रूद्रपुराण, लिंगपुराण , व भागवत गीता में पूर्ण रूप से मिलता है | आप रुद्राक्ष की पूजा घर में भी रख कर सकते है , खंडित रुद्राक्ष को धारण या पूजा नहीं करना चाहिए | 





३) रुद्राक्ष की पहचान  ;- आज कल नकली रुद्राक्ष बनाकर भी बेचे जा रहे है | जैसे फाइबर व प्लास्टिक के जरुरत है , इनसे बचने की व पहचानने की १) रुद्राक्ष को उबाले यदि उसका रंग न निकले या कोई परवर्तन न हो तो वह असली है | 



२) यदि रुद्राक्ष पानी में डूब जाता है , तो वह असली है | 
३) रुद्राक्ष के ऊपर उभरे पठार एक रूप हो तो वह नकली है, असली रुद्राक्ष की ऊपरी सतह कभी एक रूप नहीं होती | 



४) रुद्राक्ष को सुई से कुरेदे अगर रेशा निकले तो वह असली है , और न निकले तो नकली है | 
५) सरसो के तेल में डालने पर अपने रंग से गहरा दिखे तो वह असली है | 
६) रुद्राक्ष के सामान ही एक भद्राक्ष का भी पेंड होता है , जो दीखता तो रुद्राक्ष बीज की तरह ही होता है , परन्तु यह  नकली होता है , असली रुद्राक्ष में प्राकृतिक छेद होते है , जबकि भद्राक्ष में छेद कर इसे रुद्राक्ष के रूप में पेश किया जाता है | 


लेखक;-रुद्राक्ष माला हेतु_____ रविकान्त यादव for more click me ;-http://justiceleague-justice.blogspot.com/  and on https://www.facebook.com/ravikantyadava