१) पृथ्वी पर समय तेज़ी से चलता है , पृथ्वी के १०० साल इंद्र के (स्वर्ग ) के एक पलक झपकने के बराबर होता है |
इंद्र के 100 साल ब्रम्हा (ब्रम्हलोक ) के एक पलक झपकने के बराबर होता है |
ब्रम्हा के 100 साल विष्णु (वैकुण्ठ लोक ) के एक पलक झपकने के बराबर होता है |
जब विष्णु के सौ साल होते है ,तो शिव के एक पलक झपकने के बराबर होता है |
व शिव के सौ साल देवी के एक पलक झपकना के बराबर होता है |
२) स्वर्गलोक :- स्वर्गलोक से आशय प्रकाश का घर होता है , उत्तराखंड के सुमेरु पर्वत के ऊपर स्वर्गलोक है , जिसे देवलोक भी कहते है , | जहा पुण्य आत्माये रहती है , यहाँ किसी प्रकार का पाप नहीं रहता ,तथा हर तरह की सुख सुविधा आनंद रहता है | यहाँ कोई दुःख कस्ट नहीं रहता ,यहाँ के राजा इंद्र है व व्यक्ति पुण्य क्षीण होने तक यहाँ रहता है |
३)अमरावती नगरी ;- स्वर्ग की राजधानी अमरावती नगरी है , जो भव्य ,मंत्र मुग्ध , मोहक है | इसका द्वारपाल इंद्र का वाहन ऐरावत है , अमरावती से आशय अमर लोगो का शहर है , जो देवताओ से आशय है | इसका निर्माण विश्वकर्मा ने किया था |
४) वैतरणी नदी ;- गरुण पुराण अनुसार यम के द्वार पर यह नदी बहती है , अच्छे -बुरे दोनों को इस नदी को पार करना पड़ता है | जिसका पानी रक्त का होता है , जो बहुत ही गर्म बदबूदार होता है , इसका रक्त का जल पापीयो को देखकर खौलने लगता है , इस नदी में पस , हड्डिया ,लहू ,बाल भरा रहता है व खतरनाक कीड़े मकोड़े व जीव रहते है | पुण्य आत्माओ को यमदूत सहारा देकर इसे पार करा देते है |
5 )यमलोक (नर्क);-यमलोक या नरक के स्वामी यमराज है , जो अच्छी बुरी आत्माओ का हिसाब करके उनको स्वर्ग या नर्क का अधिकारी नियुक्त करते है , व पापी आत्माओ को तरह -तरह से दंडित करते है , प्रमुख भयानक 36 प्रकार की नर्क की सजाए है |
6 ) पितृलोक ;-यहाँ व्यक्ति (पिता)1 साल से लेकर 100 साल तक रहता है | जब तक उसका पुनर्जन्म न हो जाये | यमराज पितृलोक का प्रधान होता है |
7 ) गोलोक ;- यह भगवान कृष्ण की नगरी है , यही भगवान श्री कृष्ण अपने लोगो के साथ रहते है |
लेखक;-पृथ्वीलोक से ___रविकान्त यादव
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* समय की मार से और काल के पंजे से पृथ्वी पर स्वयं भगवान भी नहीं बच सकते |
* ईर्ष्यालु व्यक्ति जल में डूबते हुए वह व्यक्ति है , जो स्वयं तो डूबेगा ही साथ में आप को भी पकड़ -जकड लेगा |
* जो आप पर झुठा आरोप लगाता है , वह कही न कही असुरक्षित है और जान जाइये वह आप से तुच्छ है |
* बेटा कहने वाले हज़ार मुँह मिल जायेगे ,परन्तु बेटी कहकर सहृदयता दिखाने वाले बहुत कम |
* जीवन में सफल होने का एक ही मंत्र है, कठोर परिश्रम , क्रोध न करना और ज्ञान का दामन न छोड़ना |
* आप कितना भी ज्ञान अर्जित कर लो परन्तु उसे आचरण में नहीं लाये तो सब व्यर्थ है |
* जिस प्रकार तमाम कांटो के बीच गुलाब रहता है , उसी प्रकार बुरे लोगो के बीच भी अपना कार्य करना भी जरूर आना चाहिए |
* शर शैया पर पड़े ,द्रौपदी ने भीष्म पितामह से पुछा, भरी सभा में मेरा चीर हरण हुआ परन्तु आप कुछ नहीं बोले तो भीष्म पितामह ने कहा दुर्योधन का पाप का धन खाने की वजह से मेरी बुद्धि भ्रस्ट हो गयी थी |
* समय के बिगड़े व्यक्ति को समय ही बिगाड़ देता है |
* आज द्वेष रखने वाले भेष बदल कर रहते है |
* आहत को राहत देना ईश्वर सेवा है |
* तपस्या व अच्छाई का फल भविष्य में व्याज के रूप में जरूर मिलता है |
* बहुतयात दौलत अमीरो के लिये परेशानी का सबब व साधु संतो के लिए गले की फाँस बन जाता है |
* स्थिर , ठहराव से अच्छा है , सक्रिय प्रवाहमान बने रहो |
* अवसरवादी घात लगाए मगरमच्छ के जबड़े की तरह होता है , जो दिखाई भी नहीं देता |
* सुविधाए ही व्यक्ति को धीरे- धीरे अपना दास बना लेती है |
* जिस प्रकार अम्बर से हमें हवा ,पानी , रोशनी मिलती है , हमें भी उसी प्रकार किसी के लिए राहत व छाया बन जाना चाहिए |
* जिस प्रकार बिना फूल के फल नहीं आते उसी प्रकार बिना लगन व विनम्रता के विद्या नहीं आती |
* जिस प्रकार एक एक तिनके से घोसला बन जाता है , उसी प्रकार थोड़े थोड़े श्रम से व्यक्ति अपना भविष्य बना सकता है. मंज़िल पा सकता है |
* जिस प्रकार वज्रपात जलधारा से बड़े बड़े पर्वत भी टूट जाते है , उसी प्रकार घमंड से भरा व्यक्ति का भी नाश हो जाता है |
* जिस प्रकार बादलो में सुर्य का प्रकाश ज्यादा देर छुप नहीं सकता ठीक उसी प्रकार व्यक्ति की प्रतिभा छिप नहीं सकती |
* जैसे बिना पतवार के नाव दिशाहीन है , वैसे ही बिना उद्देश्यय जीवन दिशाहीन है |
लेखक;-विचारक ____रविकान्त यादव
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हिन्दू धर्म में कहा गया है ,84 लाख जन्मो कीट ,पतंगों ,पशु ,पक्षीयो के बाद मानव का जन्म मिलता है | ऐसे में जन्म ,मरण के चक्र से मुक्ति के लिए मोक्ष का मार्ग बताया गया है , मोक्ष से आशय ईश्वर से एकाकार होना , परमानन्द (bliss ) प्राप्ति अर्थात जिस प्रकार भूखे प्यासे को कुछ नहीं चाहिए उसे केवल भोजन व जल से ही तृप्ति मिल जाती है | ठीक उसी प्रकार मोक्ष की प्राप्ति है | स्वर्ग लोक जाना भी मोक्ष की प्राप्ति नहीं माना जाता , क्यों की पुण्य क्षीण होने पर फिर मानव जीवन लेना पड़ता है |
हमारे धर्म में ;-धर्म , अर्थ , काम , मोक्ष का विधान दिया गया है | मानव जीवन के रहन -सहन , खान -पान के विकार व उत्पन्न वासनाये व्यक्ति को भटकाने के लिए ही होती है , जो उसे मोक्ष के मार्ग से दूर ले जाती है | अपने विषय में सोचते सोचते जीवन पथ पर हम कब स्वार्थी हो जाते है , हमें पता ही नहीं चलता | समय देखते देखते व्यतीत हो जाता है | जीवन के अंतिम क्षड़ो में जब व्यक्ति को आत्मबोध होता है तो वह अपने समय का सदुपयोग न कर पाने को लेकर बहुत पछताता है |
उसे जीये गये जीवन की सभी कमीया याद आने लगती है , जैसे शिक्षा , धन , अपराध , व्यसन , नशा , जीविका, नौकरी, लोभ, मौजमस्ती ,भोग-विलास , परोपकार सदुपयोग आदि आदि | सज्जन और दुर्जन अपने अपने तरीके से जीते है , बबूल ,नीम , आम , का फल व स्वभाव अलग- अलग होता है |
कृष्ण ने अपने सुदर्शन चक्र का सदुपयोग किया , अर्जुन ने अपने गांडीव का सदुपयोग किया तब जाकर जीवन रूपी कुरुक्षेत्र पर विजय प्राप्त कर सके |
अपने धन , बल , पद, ज्ञान, सेवा जिसके पास जो सामर्थ्य है , उसे ही परोपकार की भावना बना कर कार्य करना चाहिए | पात्रता स्थिति का चयन करती है , अर्थात बुरे के संग बुरा होगा |
आइये जानते है , मोक्ष के मार्ग क्या है |
1 ) कर्मयोग ;- जैसे एक व्यक्ति नारियल का पौधा लगाता है , उसकी सेवा करता है , खाद- पानी देता है , अपने परिश्रम से उसे बड़ा करता है , फिर उससे अपनी भूख प्यास मिटाता है , यही है , कर्म योग |
कर्म योग के उदाहरण, कबीर दास जो गृहस्त जीवन जीये वो एक जुलाहा ( कपडे बुनने वाला ) थे | उनकी मृत्यु पश्चात् हिन्दू व मुस्लिम उनके शव पर अधिकार को लेकर लड़ने लगे हिन्दु कहते वो हिन्दु है | व मुस्लिम कहते वो मुस्लिम है , कहते है , जब शव से चादर हटायी गयी तो उन्हें वहा कुछ फूल मिले जिन्हे उन्होंने आपस में बांटकर अपने अपने तरीके से उनका अंतिम संस्कार कर दिया |
कर्मयोग के एक और उदाहरण एक संत हुए रविदास वो एक मोची थे , उनका कहना था , मन चंगा तो कठौती में गंगा , इनको गंगा जी ने इनकी कठौती में स्वयं दर्शन दी थी |
2 ) ज्ञानयोग ;-इसमें हमें कोई बता देता है , कि यह नारियल का पेड़ है , तथा इसका फल खाया जाता है | तथा उसके उपयोग की सारी जानकारी देता है , | इसका उदाहरण है , महर्षि वेदव्यास जिन्होंने चारो वेदो को व्यवस्थित किया , सभी पुराण लिखे महाभारत व गीता की रचना की ,तथा अपने तपोबल व योगसाधना से अमर है , व आज राज्य उत्तराखंड के बद्रीनारायण क्षेत्र में रहते है |
3 )भक्तियोग ;-इसमें हमें कोई नारियल का फल छीलकर उसका जल व गिरी हमारे हाथ में रख देता है , हमें बस उसका उपभोग करना रहता है | इसमें हमें श्रम व ज्ञान से कोई मतलब नहीं रहता , इसमें किसी की महिमा व कृपा होती है |
उदाहरण मीराबाई जो राजपरिवार से थी , कृष्ण की भक्ति में भजन गाती व नाचती रहती थी | उसका विवाह हो गया फिर भी वह पागलो की तरह बावरी नाचती गाती रहती थी , समाज में बदनामी व अपमान को लेकर उन्हें कई बार जान से मारने की साज़िश रची गयी कोसिस की गयी परन्तु उसका बाल भी बाक़ा नहीं हुआ , कहा जाता है , ऐसे में वह नाचते गाते एक दिन कृष्ण की प्रतिमा में समा गयी | भक्त प्रह्लाद व भक्त ध्रुव भी भक्तियोग के उदाहरण है |
अर्थात कह सकते है , प्रेम के मार्ग पर चलने वाले सज्जन मन,वचन, कर्म से किसी को आहत नहीं करते |
तमाम व्याधियों से पीड़ित ,यह जीवन क्षण भंगुर है | नियति को पता न क्या मंजूर हो , अतः ईश्वर से हमें सद्बुद्धि माँगना चाहिए | जीवन , संस्कार व बड़ो की सेवा का अवसर बार बार नहीं मिलता अतः नेक नीयत के साथ जीना चाहिए व सुख -दुःख में सामान मनोभाव रखना चाहिए |
लेखक;-जीवन मार्ग से ____रविकान्त यादव for more click me ;- https://justiceleague-justice.blogspot.com/
भगवान श्री कृष्ण कहते है , मन बहुत चंचल है , मन को नियंत्रण करना बहुत कठिन है | परन्तु मन को साधना दुष्कर भी नहीं है |
महाभारत में यक्ष प्रश्न पर धर्मराज युधिष्ठिर बताते है , मन की गति सबसे तेज है |
मन बड़ा स्वार्थी है , क्षण भर में अपने सपने बुन लेता है , | काम , क्रोध , मद , मोह , लोभ , ईर्ष्या , क्षण से भी कम समय में इन विकारो में से किसकी तरफ मुड़ जाये ये कहना मुश्किल होगा |
अहम् जहा मद में , मद क्रोध में , क्रोध हिंसा में ,हिंसा पाप में परिवर्तित हो सर पर कलियुग व पाप सवार होने में समय नहीं लगता |
भगवान श्री कृष्ण बताते है , शरीर रथ है , उसका सारथी मन है , आत्मा स्वामी है , व इन्द्रिया उस रथ के घोड़े है , जो मन बुद्धि द्वारा इन्द्रिया रूपी घोड़े को वश में नहीं रखते वे भोगो के लोभ में दुःख रूपी गड्ढे में गिरते है | ज्ञानी लोग बुद्धि द्वारा मन इन्द्रियों को वश कर अमृत रूपी श्रेय के मार्ग से परमानंद (ब्रम्हनिर्वाण ) प्राप्त करते है |
एक बार श्री कृष्ण सुदर्शन चक्र से कहते है , हे सुदर्शन तुम स्वयं निर्णय क्यों नहीं लेते हो , सुदर्शन कहते है , हे प्रभु मै काल यात्रा करके आपके पास आता हु , इस दौरान मै एक ही व्यक्ति को हजारो बार दुःख से ग्रस्त मरते हुए देखता हु , ऐसा जीवन किस काम का जिसमे व्यक्ति अपनी आत्मा का संवर्धन न कर सके , हे प्रभु आप ध्यान लगाकर किसे नहीं देख सकते अतः आप मुझसे स्वयं निर्णय लेने की आशा अपेक्षा न करे |
एक कथा आती है , राजा ययाति की दूसरी शादी से नाराज उनके ससुर शुक्राचार्य ने उन्हें स्त्री लम्पट कहकर बूढ़े होने का शाप दे दिया , तब ययाति के बहुत अनुनय विनय व समझाने के बाद शुक्राचार्य ने कहा तुम अपना बुढ़ापा किसी की जवानी से बदल सकते हो , अभी ययाति की भोग विलास की इच्छा गयी नहीं थी , अतः वह अपने पुत्रो से उनकी जवानी मांगते है , सभी ने मना कर दिया , ऐसे में सबसे छोटे पुत्र पुरु से पिता की यह लालसा दशा देखी न गयी उसने ययाति का बुढ़ापा ले लिया व अपनी जवानी यौवन ययाति को दे दिया , इस तरह राजा ययाति कई सौ सालो तक भोग विलास करते रहे , अंत में विषय वासना से तृप्ति न मिलने पर उन्हें इनसे भोग विलास से घृणा हो गयी , उन्होंने अपने पुत्र पुरु की युवावस्था वापस लौटा दिया व कहा ,भोग विलास , कामनाओ का कोई अंत नहीं है | व पुरु को राजपाट का अधिकारी नियुक्त कर स्वयं बैराग्य धारण कर लिया |
मोक्ष व निर्वाण का रास्ता ठीक मूंगफली के दाने की तरह है | जिसकी महत्ता नजरो से नहीं दिखती जो तमाम धूल ,मिट्टी , कीचड़ , धुप , हवा , पानी से रहित होकर सेवा भाव, उपभोग के लिए ही उत्पन्न होता है | ठीक उसी प्रकार व्यक्ति तमाम सांसारिक विकारो से बच कर जीवन सेवा भाव की तरफ लगाए , दया , प्रेम , दान, सेवा , धर्म सद्गुणों से युक्त हो |
मनरूपी समुद्र में विचार रूपी लहरे आती रहती है , जो दृणसंकल्पित रूपी किनारो से टकराती रहती है | अतः मन को दृणसंकल्पित तप द्वारा वश में किया जा सकता है |
१) भारत क्षेत्रफल की दृष्टि से सातवा व जनसंख्या के हिसाब से विश्व का दूसरा सबसे बड़ा देश है |
२) प्राचीन भारत का नाम आर्यावर्त था |
३) भारत देश का नाम चक्रवर्ती सम्राट भरत के नाम पर पड़ा है , महाभारत में अजेय भीष्म पितामह इन्ही के आखिरी वंशज थे |
४) आर्यावर्त के बाद भारत , भारत के बाद हिंदुस्तान , हिंदुस्तान के बाद भारत देश का अंग्रेजों द्वारा इंडिया नाम पड़ा |
५) इंडिया नाम इंडस रिवर(indus river ) के नाम पर जिसे हिंदी में सिंधु नदी कहते है , के नाम पर पड़ा है |जो चीन (तिब्बत से निकलकर ) भारत व पाकिस्तान से होकर बहती है |
६) भारत देश में तीन राष्ट्रीय पर्व है , जो स्वतंत्रता दिवस , गणतन्त्र दिवस व गाँधी जयंती के रूप में मनाया जाता है |
७) भारत में लोकतान्त्रिक व्यवस्था है , लोकतान्त्रिक सरकार (गणतंत्र ) का गठन होता है , लोकतंत्र से आशय जनता का शासन होता है | केंद्र व राज्य में 5 -5 साल का जन चुनाव द्वारा सरकार (गणतंत्र ) का गठन होता है |
८) केंद्र में देश की जनता के प्रतिनिधि के रूप में सांसदो का चयन किया जाता है | जिनकी कुल संख्या 543 होती है ,जिन्हे लोकसभा सीट भी कहते है |
९) क्षेत्रफल की दृष्टि से राजस्थान भारत का सबसे बड़ा राज्य है , व गोवा सबसे छोटा राज्य है |
१०) भारत में कुल 28 राज्य व 8 केंद्रशासित राज्य है, कुल 36 राज्य है |
११) जनसँख्या दृष्टि से उत्तर प्रदेश सबसे बड़ा राज्य है , व सिक्किम सबसे छोटा राज्य है |
१२) उत्तर प्रदेश 80 लोक सभा सीटो के साथ सबसे बड़ा लोकसभा सीटो वाला राज्य है , व वही उत्तर प्रदेश में 403 विधान सभा सीट है , व उत्तर प्रदेश सबसे ज्यादा जिलों वाला (75 ) राज्य भी है |
१३) सबसे बड़ा जिला गुजरात राज्य का कच्छ है ,| महे जिला जो केंद्रशासित प्रदेश पडुचेरी का अंग है , सबसे छोटा जिला है |
१४) भारत में कुल 22 भाषाये है , व भोजपुरी सहित कुल 270 मातृ भाषाए है |
१५) भारत में कुल 9 धर्म है , व bbc अनुसार कुल 3000 जातिया है , व 25000 उपजातिया है |
लेखक;- भारतवासी ___रविकान्त यादव for more click me ;-https://justiceleague-justice.blogspot.com/
बहुत दिनों नहीं हो रहे है , जब 25 व 50 पैसे के सिक्के बाजार से बाहर हो गए है | यही हाल रहा तो 1 रूपये २ रुपये व 5 रूपये के सिक्के भी एक दिन चलन से बाहर हो जायेगे | एक समय था , जब 2014 में पेट्रोल 71 रूपये लीटर था , अब 106 रूपये लीटर है |
वही L.P.G गैस सिलेन्डर 2014 में 410 रूपये था , वही आज ये 1050 रूपये हो गया है , जो दोगुने से भी ज्यादा है |
यही हालात रहे तो , वर्तमान में श्रीलंका की तरह आर्थिक संकट भी उत्पन्न हो सकते है , जहा पेट्रोल का मूल्य 338 रूपये लीटर है |
ऊर्जा के इन दो प्रमुख साधनो पेट्रोल व गैस पर ही अन्य संसाधन व वस्तुओ की मॅहगाई निर्भर करती है , इनके मूल्य बढे तो महगाई बढ़ेगी चाहे वह खाद्य पदार्थ हो ,बिल्डिंग मैटेरियल हो , परिवहन हो , उद्योग हो या नीजी क्षेत्र हो या अन्य संसाधन हो मॅहगाई की मार से कुछ भी नहीं बचा है |
जरुरत है ,अपने विरासत को कायम रखने की जैसे देश अमेरिका की है |
मॅहगाई बढ़ने की प्रमुख कारण है |
1 ) देश की G.D.P का कम होना |
२) डॉलर के मुक़ाबले रूपये का कमजोर होना |
3 ) विदेशी बैंको व विदेशी देशो से क़र्ज़ लेना |
4 ) भारत सरकार व प्रदेशीय सरकारो की निर्णय व वर्तमान नीतिया , जैसे कर निर्धारण , नीजी क्षेत्रों को लाभ पहुचाना , भ्रस्टाचार आदि |
लेखक;- मॅहगाई के खिलाफ ___रविकान्त यादव for more click me ;-https://justiceleague-justice.blogspot.com/