Wednesday, 15 February 2017

धार्मिक महत्व ( religious importance )


1)मंदिर ;- हिन्दू धर्म का पवित्र स्थान , जिसका शाब्दिक अर्थ मन का दर या द्वार होता है , देवी देव की प्रतिक चिन्ह या प्रतिमा स्थापित होती है , इसके गुम्बज़ उचे होने का वैज्ञानिक आधार प्रतिध्वनि द्वारा प्रार्थना आप तक मिले  भला हो , हिन्दू धर्म में मंदिर का वैज्ञानिक महत्त्व होता है , चाहे मुख्य कपाट  पूर्व दिशा की तरफ खुले , या शिवलिंग मुख उत्तर दिशा की तरफ हो , हिन्दू धर्म सबसे प्राचीन धर्म है ।




२)मस्जिद ;- यह स्थान मुस्लिम  बन्धुवो का पवित्र स्थान होता है , । इनका सिद्धांत है , ईश्वर एक है , अतः कोई   प्रतिमा नहीं होती  , प्रार्थना करना ही मुख्य मकसद होता है , यहाँ भी प्रतिध्वनि गूँजती है । 


३)गुरुद्वारा ;- यह शिख  धर्म का  पवित्र स्थान है , किसी भी धर्म , जाति , व्यक्ति की सेवा पर ये लोग अति ध्यान देते है , यहाँ गुरुग्रंथ साहिब रखी  रहती है , साथ में अन्य गुरुओ के चित्र लगे रहते है , व ह्रदय को छु लेने वाला भजन चलता रहता है , यहाँ भी प्रतिध्वनि गूंजती है । 


 ४) चर्च ;- यह ईसाइयो का पवित्र स्थान होता है , प्रभु यशु सलीब पर रखे दीखते है , उनके सम्मान में शांति रख मोमबत्ती जला प्रार्थना करते है । 





५) बौद्ध पगोडा ;- बौद्ध धर्म का पवित्र स्थान , गौतम सिद्धार्थ की एकमात्र प्रतिमा होती है , जिन्हें एशिया का प्रकाश भी कहते है , एक शिक्षक थे , बौद्ध धर्म हिन्दू धर्म की तरह मंदिर होता है 
। जिसे मठ या पैगोडा भी कहते है , जहा बिना बाल के सन्यासी रहते है । 


६)जैन डेरासर ;- जैन धर्म का पवित्र स्थान एक तरह का मंदिर ही है , जिसे डेरासर कहते है , यहाँ मात्र भगवन अरिहंत की प्रतिमा होती है , ये भगवान् पर नहीं पूर्ण मानव होने पर विश्वास व कर्म करते है , इनके पहले भगवान  या पूर्ण महापुरुष अरिहंत व २४ वे व आखिरी भगवान महावीर (जिन्हें वर्धमान भी कहते है ) यहाँ भी आवाज़ की धार्मिक शब्दो की प्रतिध्वनि होती है । 


७) शंख ;- हिन्दू धर्म में अधिकतर देवो के हाथ में विशेषतर  विष्णु के हाथ में  शंख दर्शाया गया है । 
इसकी आवाज़ मात्र से पवित्रता फ़ैल जाती है , इसे घर में रखना अति शुभ माना जाता है , इसमें जल रख कर देव अर्पण पर देव अति प्रसन्न होते है , शिवाय शिव के क्यों की शिव जी ने शंख चुड का वध किया था । 
साधारण जल भी इसमें रखने पर गंगाजल तुल्य हो जाता है , इसकी आवाज़ को सृस्टि के निर्माण में बनी आवाज़ ॐ से जोड़ा जाता है । 


 ८)श्याम कर्ण घोडा ;- अति उत्तम ऐसे घोड़े का शरीर सफ़ेद और कान काले होते है , प्राचीन समय में इसे राज्य व श्रीराम अश्वमेघ यज्ञ में छोड़ा गया था अति दुर्लभ वर्तमान समय में शायद ही मिले । 


९) तुलसी ;-हिन्दू धर्म में इसका विशेष स्थान है , भगवान् विष्णु से जुडी व प्रिय आहार अर्पण , इसके पत्ते बहुत गुणकारी होते है , व रोग नाशक होते है , । 
यह २४ घंटे ऑक्सीजन प्रदान करती है , इसे घर में लगाने पर सुख शांति रहती है । नकारात्मक ऊर्जा व हानिकारक गैसों जैसे कार्बोनमोनो डाईऑक्साइड  , कार्बन डाइऑक्साइड , सल्फर डाइऑक्साइड , आदि को सोख लेती है , धार्मिक, पौराणिक,और वैज्ञानिक आधार की वजह से उत्तम पौधा है ॥ 


लेखक;- धार्मिक ______रविकान्त यादव for more click ;- https://www.facebook.com/ravikantyadava
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ग्रहो की चाल (speed of planet )

सूर्य से  दुरी के आधार पर क्रम से निम्न ग्रह  है , सारे दिनों  के नाम भी इन्ही ग्रहो के नाम पर है । 
बुध (mercury  );- को हिन्दू धर्म में चाँद का बेटा बताया गया है जो चाँद के बाद क्रम में है , ये सूर्य के निकटम है  व सबसे छोटा ग्रह है , हिन्दू धर्म में बुध को बुद्धि का देवता बताया गया है । शायद इसी से इसका नाम बुध है , इसका वायुमंडल नहीं है , तापमान ४५० डिग्री व १७० डिग्री तक कम हो जाता है । यहाँ मानव नहीं रह सकते यहाँ ८७.९७ (लगभग ८८ दिन ) का एक साल होता है । 

शुक्र (venus ) ;- यहाँ एक वर्ष  २२५ दिन का है , हिन्दू धर्म में शुक्र को राक्षसो का गुरु कहा गया है , चन्द्रमा के बाद इसकी चमक के कारन इसे भोर का तारा भी कहा जाता है ,  आकार प्रकार में इसे पृथ्वी जितना होने पर इसे पृथ्वी की बहन कहा जाता था ,।  यहाँ 95 % कार्बनडाई ऑक्साइड  व नाइट्रोजन व सल्फर के बादल है । 
व 350 km से तूफ़ान चलते है , इसका तापमान ४६० डिग्री सेंटीग्रेड है , जो अधिकतर यही सिमित है । 



पृथ्वी ( earth ) ;- ३६५ दिन में सूर्य का एक चक्कर लगा लेती है , यह वह गृह है जहा हम मानव ,पशु ,पक्षी हरियाली, पानी व हवा रहती है , जहा हम मटर गस्ती करते है । 

मंगल (mars ) ;- हिन्दू धर्म में इसे पृथ्वी का बेटा  बताया  गया है , ये पृथ्वी का आधा है , व यहाँ कभी जीवन था या बसाया जा सकता है , यहाँ 687 दिन का एक साल होता है , यहाँ न्यूनतम तापमान माइनस  -125 डिग्री है , व गर्मी में २० डिग्री सेंटीग्रेड है । 
इसकी सतह लाल है ,  जो वहा के लोहे के धुल में oxygen से क्रिया करके बनी है , ऑक्सीजन व लोहा का होना , जो प्रमाण है , कभी वहा सभ्यता  व जीवन था , वहा रेडिएशन भी मिल रही है , जो दर्शाता है शायद वहा हाइड्रोजन बमो का युद्ध हुआ हो , वहा गया रोवर oppourtunity  अजब तथ्य खोज व फोटो भी भेज रहा है ।
वह एक रोवर के साथ वैज्ञानिक भी है । कभी मंगल पर नदिया थी , जो शायद किसी विनाशक  हथियार से सुख गयी हो अभी भी वहा एलियन के बनाये यंत्र भी दिखे है , तथा तमाम मानव मूर्ती व पत्थर कला भी दिख रही है , एक खबर अनुसार ग़िज़ा के पिरामिड मंगल ग्रह  के एलियन ने बनाया था , तो फिर आज मंगलवासी गए कहा ?? फिलहाल जो भी हो आने वाले ५-१० वर्षो में सारा कुछ स्पस्ट  हो जायेगा जैसा ठीक the  martian फिल्म में दिखाया गया है ।  मानव जीवन के अनुकूल यहाँ बर्फ के काफी भण्डार दबे पड़े है ।  

वृहस्पति (jupiter ) ;- सौरमंडल का पाँचवा व सबसे बड़ा ग्रह है , इसके कुल ६७ चन्द्रमा है जो की उल्का पिंड है ।  हिन्दू धर्म में इसे देवताओ के गुरु बताया गया है , वैसे यह ग्रह गैसों का ग्रह है , जहा हाइड्रोजन , हीलियम , मेथेन आदि है । ठोस रूप नहीं है , इसका तापमान बादलो में माइनस १४५ डिग्री सेंटीग्रेड है व केंद्र में सूर्य से भी गर्म २४००० डिग्री सेंटीग्रेड है जो सूर्य से भी गर्म है , नासा अनुसार यह वृहद् है , यह सूर्य का चक्कर नहीं लगाता  वृहद् स्वरुप ही इसका नाम वृहस्पति है । सूर्य व वृहस्पति space अंतरिक्ष में point कर चक्कर कर घूम रहे है । 
शनि (saturn );- दूसरा सबसे बड़ा ग्रह  है , यह भी गैसों का ग्रह है , हाइड्रोजन ९६%  हीलियम ३% मेथेन ४% प्रमुख है , 10759 दिन में सूर्य का एक चक्कर लगाता है , लगभग धरती के (29.5 साल में ) इसका तापमान -१७८ डिग्री सेलसियस है , व बीच का तापमान -१२७ से -२८ डिग्री सेलसियस व नीचे के बादल 57डिग्री सेलसियस है । हिन्दू धर्म में शनि सूर्य का पुत्र है , जिसकी दृष्टि खतरनाक मानी जाती है जो एक गुरु के रूप में है । 


अरुण (uranus );- तीसरा सबसे बड़ा घेरे वाला ग्रह , सबसे ठंडा ग्रह है इसका वातावरण वृहस्पति व शनि जैसा ही है , बिना सतह के हीलियम , मेथेन प्रमुख गैस है , हिन्दू धर्म में इन्हें सूर्य के सारथी है , पृथ्वी अनुसार 84 साल में सूर्य का एक चक्कर लगाता , यह बर्फ का ग्रह है , ऊपरी सतह पानी व अमोनिया की है एक  ठंडा ग्रह है , न्यूनतम -२२४डिग्री सेलसियस और व दिन में अधिकतम 577 डिग्री सेलसियस है , यहाँ भी मंगल को छोड़कर मानव जीवन नहीं बसाया जा सकता । 


वरुण (neptune );- हिन्दू धर्म में ये जल व समुद्र के देवता है । यह चौथा सबसे बड़ा ग्रह है व सूर्य से सबसे दूर है , । यह सूर्य का एक चक्कर धरती के नियमअनुसार  164.8  साल में लगाता है । 
यह  बर्फ का ग्रह है , इसकी वजह हाइड्रोजन , हीलियम, हाइड्रोकॉर्बन , व nytrogen है । 
जो पानी , अमोनिया , मेथेन की वजह से बर्फ है इस ग्रह पर का तापमान -218 है व अधिकतम १० डिग्री सेलसियस से तनिक है । इसकी निश्चित सतह नहीं है । 
यहाँ ८०% हाइड्रोजन , १९% हीलियम , थोड़ा पानी और मेथेन है । 


लेखक;-दिनों के नाम  से _______रविकान्त यादव for more click ;- https://www.facebook.com/ravikantyadava
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Monday, 13 February 2017

उल्कापिंड (meteoroid)


उल्कापिंड में ९०% पत्थर होता है , । बाकी लोहा , निकिल , या अन्य धातु होते है । ये हमारे ग्रह पृथ्वी के भाग या अंश नहीं है , ये अंतरिक्ष से भटककर पृथ्वी पर आते है , । औसतन साल भर में १० ग्राम तक १८००० से ८४००० तक  उल्कापिंड साल भर में पुरे पृथ्वी पर गिरते है । 

ये या तो किसी ग्रह पर एक दूसरे की टकराहट से बनते है या ये कोई उच्च सभ्यता द्वारा भेज गया सेटेलाइट उपग्रह , रिसीवर या रोवर हो सकते है , जो समय यात्रा द्वारा विकृत रूप में हमें प्राप्त होते हो , फिलहाल पूर्ण सत्यता नासा  ही  बता सकता है । 

उल्कापिंड को meteoride , asteroid , comet भी कहते है , हिंदी में टूटता तारा , लुका आदि कहते है । 
यदि उल्कापिंड आकर में छोटा है , तो पृथ्वी के वातावरण में रासायनिक क्रिया कर स्वयं जल कर नस्ट हो जाते है ,
जिसे आप आसमान में टूटते तारे के रूप में देख सकते है , अगर ये बहुत बड़े हुए तो इनका कुछ अंश धरती पर गिरेगा ही जो जान माल की भीषण तबाही मचा सकता है , । 
एक समय उल्कापिंड मंगल ग्रह जितना पृथ्वी से टकराया था उसके टक्कर से धुल, गुबार से चन्द्रमा बना वही एक उल्कापिंड के टक्कर में डाइनोसोरो का सफाया हो गया था । 
अतः कोई भी बड़ी उल्कापिंड पृथ्वी व पृथ्वी के जीवन को तबाह कर सकती है । 


लेखक;-टूटते तारे देखते______रविकान्त यादव  for more click me ;-https://www.facebook.com/ravikantyadava
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Tuesday, 7 February 2017

द्वापर युग के नायक (heroes of dwaper era )


१) परशुराम ;- इस युग के ही नहीं सतयुग , त्रेता, द्वापर , के  भी महान नायक , इन्होंने द्वापर युग में अपना सब कुछ ब्राह्मणों को दान दे दिया व महेंद्र गिरी पर्वत पर तपस्या को चले गए , अंत में द्रोणाचार्य पहुचे और दान देने की गुजारिश की परशुराम जी ने कहा अब मेरे पास इन अस्त्र शस्त्र के सिवाय कुछ भी नहीं बचा है , 
चतुर द्रोणाचार्य ने उनसे उनके अस्त्र शस्त्र व उनकी विद्या दान में  माँग ली । 
आज भी परशुराम महेंद्र गिरी पर्वत पर तपस्या कर रहे है । 


२) श्रीकृष्ण ;- इस युग के महान नायक या यु कहे ये इन्ही का युग था १२५ साल की उम्र तक धर्म , सत्य ,न्याय  हेतु सब कुछ किया ,गीता ज्ञान दिये , व अर्जुन , सुदामा , अभिमन्यु जैसे सखा और शिष्य भी बनाये , ये अर्जुन और दुर्योधन दोनों के संबंधी थे , दोनों को सामान अवसर और ताक़त देते हुए महाभारत में एक ने उनकी सेना मांग ली दूसरे अर्जुन ने स्वयं उन्हें , परंतु बिना अस्त्र शस्त्र के भी धर्म को विजय दिलाये , इनके सुदर्शन और महान नीति का तोड़ संभव नहीं था । 


३) भीष्म पितामह ;- माता गंगा और शांतनु के पुत्र परशुराम के, द्वापर के पहले शिष्य , इच्छा मृत्यु का वरदान होने से इन्हें पराजित करना असंभव था , पांडव सेना को प्रतिदिन दस हज़ार लोगो को मारते थे , किसी को भी मारने में सक्षम।, परंतु दुर्योधन आदि कुटुंब से विवश रहते थे । 


४)अर्जुन;- बिरला धनुर्धारी , द्रोणाचार्य से इंद्रलोक से , शिव से सभी दिव्यास्त्रों का धारक कर्म व वचन से व वनवास तक पूरी शिद्दत से निभाने वाले , महाभारत में पांडव की तरफ से सबसे बड़े योद्धा धनुर्धारी ।






५)कर्ण  ;- एक राजपुत्र व सूर्यपुत्र होने के बाद भी सूतपुत्र निम्न जाति  सूतपुत्र का अभिशाप लेकर जीना परशुराम के शिष्य व विजय धनुष के धारक जिसे इन्होंने केवल अर्जुन के साथ युद्ध में प्रयोग किये , विजय धनुष को मात्र थाम लेने से उसे धारक को पराजित करना नामुमकिन होता था , जो इन्हें देव परशुराम ने दिया था , अभाव में भी अपने पराक्रम व योग्यता से महान  दानवीर  कहलाये , श्री कृष्ण भी इनसे प्रभावित थे , युद्ध में अर्जुन के विरुद्ध अश्वसेन नाग के सहयोग को इन्होंने ठुकरा दिए व सच्चे योद्धा कहलाये । 



६)युधिस्ठिर ;- इनके धर्म पर चलने की वजह से सभी धर्मपरायण लोग इनकी सहायता करते रहते थे , इनमे सूर्य देव , धर्मराज, कृष्ण, विदुर, आदि अन्य लोग थे , द्वापर युग के सबसे बड़े धर्मवीर कहलाये जाते है , इन्होंने सशरीर  स्वर्गारोहण किया । 


७)अभिमन्यु ;- अर्जुन के पुत्र श्री कृष्ण के शिष्य सबसे कम उम्र का योद्धा , एक खास तरह की धनुर्विद्या में महारत पांडवो का दूसरा सबसे बड़ा धनुर्धारी  , इन्हें चंद्रमा के पुत्र का अवतार भी कहा जाता है , १६ साल की उम्र में महारथियों द्वारा घेर कर रणभूमि में शहीद । 


८) महर्षि वेद्व्यास  ;- सत्यवती के पुत्र व भीष्म पितामह के बड़े भाई सभी वेदों की व्यवस्था करने से इनका नाम वेद व्यास पड़ा , गीता की भी रचना की , अपने तपोबल व योग साधना से आज भी जीवित है । 


लेखक;-  नायको हेतु ______रविकान्त यादव for more click ;-https://www.facebook.com/ravikantyadava
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Sunday, 5 February 2017

चींटी की चिंता (ant in trouble)


एक बार चीटियों का झुण्ड कार्य कर रहा था , तभी अचानक हाथियों का झुण्ड गुजरता है , और अनेक  चींटी कुचलकर मारी जाती है , तभी एक चींटी सोचने लगती है , अपने हाल पर कि मैं दुनिया की सबसे कमजोर प्राणी हु , कोई भी कुचल जाता है ,
थोड़ी हवा पानी से उड़ बह जाती हु , मेरी जिंदगी व्यर्थ है , अब मैं आत्महत्या कर लुंगी और भगवान् से सारे प्रश्नों का उत्तर लुंगी , ईश्वर को कोई हक़ नहीं की हम चीटियों को कमज़ोर बनाये वह गुस्से में चली जा रही थी , आत्महत्या करने , तभी रस्ते में उसे टोकते हुए अपनी मस्ती में गाना गाते हुए एक घुन ने कहा अरे चींटी बहन कहा जा रही हो ,
चींटी ने कहा आत्महत्या करने , घुन ने कहा क्यों ? तो उसने कहा मैं दुनिया में सबसे कमजोर प्राणी हु , इसलिए तब घुन ने कहा तुम कमजोर कैसे हो सकती हो , तुम तो कही भी रह सकती हो कुछ भी आहार ले सकती हो , तुम लोगो में गजब की एकता है , और अपने अपने वजन का चौगुना वजन  भी उठा सकती हो , तुमसे कही अधिक कमजोर तो मैं हु , तब चींटी ने पूछा कैसे तब घुन ने कहा एक किसान अपना अनाज ले जा रहा था , हलकी हवा चली और मैं उड़ कर रास्ते पर आ गया अब कही अनाज भंडार खोज रहा हु , ताकि जी सकु
, मैं अनाज पर ही जिंदा रहता हु , पानी से भी भय है , और अनाज के साथ पीस भी जाता हु , परंतु मुझे कोई दुःख नहीं जिसने भी ये जीवन दिया है, ये जीवन भी उसी परमात्मा के अधीन है , मैं अपना काम कर रहा हु और परमात्मा अपना । 
आप चींटी की आँखे खुल चुकी थी उसे बोध हो गया था  , कि बिबस  से भी बिबस जिव जंतु भी इस संसार में है । 
अतः हमें अपने हित के लिए ही नहीं बल्कि अच्छे सामाजिक कार्य के लिए जी कर सहारा, मार्गदर्शक बन कर जीवन को सार्थक बनाना चाहिए , । 
आज आप जो बिबस है , कही न कही आपसे भी मजबूर व्यक्ति खुसी से अपनी जिंदगी जी रहा है , वो आपके हताश जीवन के लिए प्रेरणा का श्रोत है । 
विधाता ने दिया सभी को रूप रंग आकर प्रकार । 
सभी जीवो का है अपना घर संसार ॥ 
विनती मेरी सभी प्राणियों से बारम्बार । 
जिंदगी उपहार है , ईश्वर का, जिंदगी से कर लो प्यार ॥ 

लेखक;- प्रेरित प्राणी _______रविकान्त यादव for more click me ;- https://www.facebook.com/ravikantyadava
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जीवन दाता ( the creater and feeling )

शाम का समय था , हल्की हवा में पत्ते झूम रहे थे , पास ही मंदिर था , एक बालक संध्या  और प्रकृति का आनंद उठा रहा था , । तभी अचानक आंधिया चलने लगी , जमीन पर पके फलो का ढेर लग गया , उसी आम पर लाल चीटियों का घोसला भी था , घोसला सीधे उस बालक के  ऊपर आकर गिर जाता है । 
लाल चीटिया जहरीली और आक्रामक होती है , उन्होंने बालक को काटना आरम्भ कर दिया बालक ने सोचा इन चीटियों को यदि मैं बना नहीं सकता तो हानि और मारने वाला मैं कौन ? 

उसने  घोसला उठा कर सीधे आम के तने पर वापस रख दिया तथा पके आमो को उठा कर वहा से चला गया । 

लेखक;- दर्शनार्थ_____रविकान्त यादव 




Friday, 3 February 2017

हैलो डॉक्टर ( ayurveda help with self treatment )


आयुर्वेद में त्रिदोष ;- वात , पित्त, कफ , अनुसार ही इलाज़ होता है , 

वात रोग ;-जिसे वायु रोग भी कहते है , आशय भीतरी हवा जिससे अनेक रोग होते है , आयुर्वेद अनुसार वात रोग 80 प्रकार का होता है , इनमे अधिकतर पेट से सम्बंधित रोग आते है , जैसे एसिडिटी , भूख न लगना , दस्त , गैस,  हैजा ,आंव , पेट में कीड़े , अपच , अजीर्ण , कब्ज़ , भोजन का ठीक न पाचन , चर्म रोग आदि ही वात  रोग है , ।

इससे उपजने वाले रोग १) आमवात ;- इसमें बुखार , जोड़ो में दर्द , हाथ पैर  अकड़न , हड्डी में पानी , जोड़ दर्द , २) संधिवात  ३) गाउट ;- पथरी बनना ४) कमर ह्रदय की मांसपेशी में दर्द ५) गठिया ६) पेट फूलना , गैस , सर दर्द , शरिर दर्द , डकारे , हिचकी , आदि । 

वात रोग के इलाज़ ;- फल रस , जैसे अंगूर , मौसमी , संतरा , निम्बू तथा शहद दिन में चार बार एक चम्मच लेना चाहिए तथा हड्डी कमजोर न हो इसलिए  भोजन में पालक , दूध , गाजर , टमाटर , खाना चाहिए , कच्चा लहसुन खाये , मेथी दाना अजवायन ले , दोपहर छाछ पिए । 
सुबह टहले तिल तेल से मालिश ले , धुप में मालिश अति उत्तम , समय पर भोजन ले तथा कुछ दवाये ले जो है ;-वातान्तक वटी , वातनाशक चूर्ण , ३) कुलगवात ( सायटिका ) इसके साथ परहेज तली  चीजो से दूर रहे ४) वातनासक काढ़ा पिए ५) गठिया (संधिवात );-वातनाशक तेल  ७) वायगोला का दर्द ;- वात हेतु तेल लहसुन का उपयोग करे । 


३)पित्त रोग ;- चिड़चिड़ा होना पित्त अर्थात पित्ताशय से जुड़ा है जो वहा जो एक रस निकाल खाना पचाता है , । यह जो ज्यादा या कम न हो , पित्त रोग में शरीर गर्म रहता है , इस रोग में पीलिया हो सकती है , या होती है , छाती गले पेट में जलन , जीभ पर छाले ,खट्टी डकारे , सर दर्द , भूख न लगना , 
आँखों में जलन । 

पित्त रोग का इलाज़ ;- शतावर , त्रिफला , आंवला चूर्ण , पिप्पली , गिलोय रस , आवला मुरब्बा , काढ़ा , नीबू पानी पिए , खुश रहे , योग करे , 

कारण ;-या परहेज करे ,शराब, मांस , अंडा , तम्बाखू , तले भोजन, तेज मिर्च मशाला , कम पानी पीना , आदि से  पित्त की समस्या उत्पन्न होती है । 




कफ रोग ;- इसमें मोटापा रहता है , व सुस्ती रहती है मुह में मीठे का स्वाद रहना त्वचा पीला  होना, शरीर में ठंडापन , खुजली , पेशाब, व पशीने से जुडी समस्या , साइनसाइटिस , कोल्ड ( ठंड ) सीने मुह से बलगम निकलना , बाहरी संक्रमण व प्रतिरक्षा तंत्र कमजोर होना । 
अस्थमा , गले में खराश , खाँसी , डाईबिटिज , जैसी समस्या आदि ।


कफ रोग रोग के इलाज़ ;- गर्म कपडे पहने ,गर्म आयुर्वेदिक काढ़ा पिए , शहद, दालचीनी, अदरक, लौंग, मुलेठी, तुलसी की चाय पिए ,
आसव व अरिष्ट दवा भी फायदेमंद है । 
यूकिलिप्टस तेल व पीपर मिंट तेल की दो दो बूँद पानी में डाल भांप ले इससे तेज़ी से राहत मिलती है , मसाला न खाये , विटामिन A , सी , और E ले । 
खासी , जुकाम, में सितोपलादि चूर्ण शहद के साथ ले । 

लेखक;- स्वास्थ्य हेतु ......... रविकान्त यादव for more click me ;-https://www.facebook.com/ravikantyadava
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