Tuesday, 26 April 2022

मॅहगाई की मार (dearness problem)

बहुत दिनों नहीं हो रहे है , जब 25  व 50  पैसे के सिक्के बाजार से बाहर  हो गए है | यही हाल रहा तो 1 रूपये २ रुपये  व 5 रूपये के सिक्के भी एक दिन चलन से बाहर हो जायेगे | एक समय था , जब 2014 में पेट्रोल 71 रूपये लीटर था , अब 106 रूपये लीटर है | 

वही L.P.G गैस सिलेन्डर 2014  में 410 रूपये  था , वही आज ये 1050 रूपये हो गया है , जो दोगुने से भी ज्यादा है | 

यही हालात रहे तो , वर्तमान में श्रीलंका की तरह आर्थिक संकट भी उत्पन्न हो सकते है , जहा पेट्रोल का मूल्य 338 रूपये लीटर है | 

ऊर्जा के इन दो प्रमुख साधनो पेट्रोल व गैस पर ही  अन्य संसाधन व वस्तुओ की  मॅहगाई निर्भर करती है , इनके मूल्य बढे तो महगाई बढ़ेगी चाहे वह खाद्य पदार्थ हो ,बिल्डिंग मैटेरियल  हो , परिवहन हो , उद्योग हो या नीजी क्षेत्र हो या अन्य संसाधन हो मॅहगाई की मार से कुछ  भी नहीं बचा है | 

जरुरत है ,अपने विरासत को कायम रखने की जैसे देश अमेरिका की है | 

मॅहगाई बढ़ने की प्रमुख कारण है | 

1 ) देश की G.D.P का कम  होना | 

२) डॉलर के मुक़ाबले रूपये का कमजोर होना | 

3 ) विदेशी बैंको व विदेशी देशो से क़र्ज़ लेना | 

4 ) भारत सरकार व प्रदेशीय सरकारो की निर्णय व वर्तमान नीतिया , जैसे कर निर्धारण , नीजी क्षेत्रों को लाभ पहुचाना , भ्रस्टाचार  आदि | 

लेखक;- मॅहगाई के खिलाफ ___रविकान्त यादव for more click me ;-https://justiceleague-justice.blogspot.com/ 

and https://www.facebook.com/ravikantyadava 




Sunday, 6 March 2022

कोल्ड ड्रिंक के नुकसान (harmfull cold drinks)

केवल प्रचार के दम  पर अरबो रुपये तक बिकने वाला कोल्ड ड्रिंक में कोई भी शारीरिक पोषण  सम्बन्धी तत्व नहीं है | 

इसमें तमाम नुकसानदायक केमिकल होते है ,कोल्डड्रिंक में उच्च स्तर तक चीनी होती है ,और उच्च स्तर तक फ्रुक्टोस कॉर्न सिरप होता है , जिससे शुगर (मधुमेह ) रोग होता है , मोटापा बढ़ता है , यही नहीं यह दिल व लिवर को भी प्रभावित करता है , इसमें मौजूद फास्फोरिक एसिड से हड्डियों  क्षरण होता है और किडनी की बीमारिया होती है , यही नहीं इसमें मौजूद सिट्रिक एसिड कई तरह के दाँत की बीमारियों का कारण होती है , जैसे दाँत कमजोर होना | 
इसमें मौजूद कैफीन से अनिद्रा , उच्च रक्तचाप , ऑस्टियोपोरेसिस , नपुंसकता , दिल का रोग, अल्सर तक हो सकता है | इसमें मौजूद सोडियम बेनजोट  जिससे कैंसर , दमा होता है , | 

इसमें मौजूद आर्टिफीसियल मिठास होती है , जो माइग्रेन (सर दर्द ) मेमोरी लॉस , मानसिक संवेदनशीलता , दृष्टि दोष , कान रोग , दिल की बीमारी , साँस सम्बन्धी रोग होता है ,| अतः कह सकते है , कोल्ड ड्रिंक में ज़हर मिला होता है |  

इसकी जगह गर्मियों में हम लस्सी , छाछ , दूध , आम पन्ना , फलो का रस , निम्बू पानी , सत्तु पेय , शर्बत , गन्ने का रस , ठंढई , बेल शरबत , आदि  पी सकते है | 

हाँ  एक बार कोल्ड ड्रिंक से अपने बाथरूम व टॉयलेट को जरूर साफ़ कर देख सकते है | 

 
लेखक ;-कोल्ड ड्रिंक से ______रविकान्त यादव 

Friday, 25 February 2022

देव दर्शन व प्रतीक ( symbol and sign of god )

हिन्दू धर्म में अधिकतर प्रमुख सभी देवताओ के कोई न कोई  वाहन है | जो उनके (वाहनो ) के माध्यम से प्रतीक चिन्ह भी दर्शाते है , जिससे उनके व्यक्तित्व व चरित्र का अंदाजा लगाया जा सकता है | 

आइये जानते है , उनके वाहन व उनके प्रतीक अर्थ | 

१) भगवान शिव का वाहन नंदी बैल है , जो परिश्रम , निर्भरता , ताक़त ,हिम्मत, आनंद व हर्ष का प्रतीक है | 

२) कृष्ण व भगवान् विष्णु का वाहन गरुण पक्षी है, जो उग्र हिंसक शक्तिशाली है , जो गति , कौशल- योद्धा  व वीरता का प्रतीक है | 


३) देवी सरस्वती , विश्वकर्मा , गायत्री , व ब्रम्हा का वाहन हंस है , जो कृपा , सुंदरता , समर्पण , भक्ति , प्यार, सत्यनिष्ठा , शुद्धता , शांति, साझेदारी , ऊर्जा , शिष्टता , सुरक्षा , रचनात्मक्ता , व परिवर्तन का प्रतीक है | 

४) शनिदेव का वाहन क्रमसः गिद्ध व कौवा है ,जो गिद्ध- मृत्यु , पुनर्जन्म , बराबरी, अनुभव, उपाय कुशलता,सुरक्षा ,विश्वास , गंभीरता , चतुराई , सफाई का प्रतीक है ,| वही कौवा परिवर्तन , बदलाव , निर्भय , भाग्य , व शरारत का प्रतीक है | 

५) कल्कि , इंद्र, व सूर्य देव का वाहन घोड़ा है ,जो दृढ़ निश्चय ,धैर्य , वीरता , आज़ादी, यात्रा , सुंदरता ,वैभव , महिमा ,आत्मभावना का प्रतीक है | 


६) इंद्रदेव का वाहन हाथी है, जो देवत्व व राजशाहीपन का प्रतीक है | 


७) देवसेनापति कार्तिकेय का वाहन मोर है , जो सुंदरता ,प्यार व जोश जूनून का प्रतीक है | 


८) गणेश जी का वाहन चूहा है , जो साहसिक व दृढ हठी  होने का प्रतीक है | 


९) अग्नि देव का वाहन भेंड़ा है , जो साहस , नयी शुरुआत , नयी राह व  शक्ति का प्रतीक है | 


१०) भैरव जी का वाहन कुत्ता है , जो अनुकूलनीयता , परिवार, मित्रता , स्नेह , निष्ठा , भक्ति , समर्पण , धैर्य , दृणता , बहादुरी , संरक्षण , संवेदनशीलता , सूक्ष्म दृष्टि , उद्देश्य व ख़ुशी का प्रतीक है | 

११) गंगा जी का वाहन मगरमच्छ है , जो आदिकाल , मौलिकता , बुद्धिज्ञान , कार्यक्षमता , गोपनीयता , व आशय अन्य शक्तिशाली समूह से है | 

१२) दुर्गा जी व उनके सभी रूपों का वाहन शेर है ,जो   साहस , महानता , राजपरिवार  से, शक्ति , भव्यता , व वीरता का प्रतीक है | 


१३) कामदेव का वाहन तोता है , जो आवाज़ , सम्पर्क  व शब्दों के ताक़त का प्रतीक है | 

१४)  चंद्र देव व वायु देव का वाहन हिरन है , जो आध्यात्मिक अधिकार , नया जन्म , ईश्वर भक्ति , जो अपने बच्चो का ख्याल रखने का प्रतीक है | 

१५) यमराज या धर्म राज का वाहन भैसा है , जो प्रचुरता , अभिव्यक्ति (प्रकट करना ) वही सफ़ेद भैसा आशा , व अच्छे समय के आने के संकेत का प्रतीक है | 

१६) कालरात्रि व शीतला जी का वाहन गर्दभ (गधा ) है , जो धैर्य , सहनशक्ति , दीनता , बिनम्रता , व साहस का प्रतीक है | 

१७) लक्ष्मी जी का वाहन उल्लू है , जो धन ,समृद्धी , बुद्धि , अच्छा भाग्य , और सफलता का प्रतीक है | 

१८) कुबेर जी का वाहन नेवला है , जो जोखिम भरा अनुभव , साहसिक , पराक्रम , आवेगशील , व  विद्रोही स्वाभाव का प्रतीक है | 

१९) भूमि (धरती माता ) ,शैलपुत्री ,महागौरी ,दत्तात्रेय का वाहन गाय है ,जो उपजाऊपन , उदारता,मातृत्व , जीवन का उदय , व शांति का प्रतीक है | 

२०) यमुना नदी का वाहन कछुवा है , जो सफलता , लम्बे जीवन , बुद्धि , धैर्य व शांति  ज्ञान का प्रतीक माना गया है | 
लेखक;-देवी देवताओ से ______रविकांत यादव 




Thursday, 20 January 2022

प्लास्टिक रोको (say no to plastic)

 प्लास्टिक या पॉलिथीन एक हजार (१०००) सालो तक सड़ता नहीं है | चीन व अमेरिका इसके सबसे बड़े  वेस्टेज कचरा उत्पन्न करने वाले देश है , चीन अपने प्लास्टिक कचरे को भारत में सप्लाई करने की निति पर चल रहा है | अमेरिका में बायोडिग्रेडेबल  प्लास्टिक बनती है , जो कुछ  समय बाद पर्यावरण में अपने आप घुल कर नष्ट हो जाती है | 

जरुरत है , भारत में भी बायोडिग्रेडेबल प्लास्टिक लागू करने की  जो मक्के के दाने के स्टार्च से बनाया जाता है | 

जरुरत है , आज कुरकुरे , चिप्स , नमकीन अन्य पैकेट बंद उत्पाद , पॉलिथीन पैकेट , पानी पीने व खाने के प्लास्टिक के थाली गिलास बंद हो , प्लास्टिक के पानी के बोतल , चप्पल आदि प्लास्टिक के उत्पाद बंद हो , व बायोडिग्रेडेबल प्लास्टिक क़ानूनत: अनिवार्य  किया जाय  | 



प्लास्टिक के नुकसान 

१) जलीय जीवो नदीयो व समुद्रो में कछुवो, मछलियों व्हेल ,डॉलफिन आदि जीवो द्वारा पॉलिथीन  निगलने पर उनकी मौत हो जाती है | 


२) यह जल में मिलने पर जल को जहरीला बना  देता है | 

३) गाय , भैस द्वारा इसमें छिलके आदि डाल कर फेके जाने से खा लिए जाने से ये उनके पेट में पहुंच जाता है , जो नष्ट नहीं होता , तथा उनको  नुकसान पहुचाने के साथ जहरीला दूध भी हम तक पहुँचता है | 


४) मिट्टी  पर अपने केमिकल के द्वारा यह मिट्टी को बंजर अनुपजाऊ भी बनाता है | 

प्लास्टिक का उपयोग 

१)प्लास्टिक को कोलतार में डालकर पिघला कर सड़क बनाया जा सकता है | 

२) प्लास्टिक को रीसाइकिल कर कुर्सी आदि बनाई जा सकती है | 

३) परन्तु सवाल यह उठता है , डंप पड़े कूड़े से इन प्लास्टिक छांटे कौन  ऐसे में इनके मॉलिक्यूल्स को तोड़ने के लिए इनके ऊपर हमारा राष्ट्रीय वृक्ष बरगद लगाकर कुछ हद तक पर्यावरण को नुकसान होने से  बचाया जा सकता है | 

खुले में व धुप पानी से इनके मॉलिक्यूल्स टूट जायेगे ऐसे में  गड्ढा कर इनके ऊपर कई विशेष पौधे जैसे बरगद आदि लगाए जा सकते है | 

४) कुछ कीड़े जैसे गैलेरिया मेलानेल्ला (wax moth ) कैटेरपिल्लर प्लास्टिक खाते है , बदले में हमें उर्वरक मिलता है ,इन कीड़ो की उपयोगिता देखते  हुये  केंचुए की तरह इनकी खेती की जा सकती है | 

आज प्लास्टिक हमारे जीवन का बहुत सस्ता अभिन्न अंग बन चुका है | यह हर जगह किसी न किसी रूप में मौजूद है , अतः जरुरत है ,इसके विकल्प को  तलाशना व लागू  करना , व प्लास्टिक या पॉलिथीन पर सख्ती से रोक लगाने की भी आवश्यकता है | 

लेखक;- खोजी____रविकान्त यादव for more click ;-http://justiceleague-justice.blogspot.com/

and https://www.facebook.com/ravikantyadava



Friday, 11 June 2021

नास्तिक की भावना (atheist feeling)

एक व्यक्ति थे , पुरे नास्तिक , धर्म कर्म से कोई मतलब नहीं बस शराब पीना , जुआ खेलना , मारपीट , गाली गलौज , पैसे के लिए हाय हाय करना एक बार उनकी कद काठी देखकर एक फिल्म बनाने वाले ने उसे अपने रामलीला में काम करने के बदले पैसे देने की बात कही , बस फिर  क्या था ,पैसे के लिए वो कुछ भी कर सकता था , डायरेक्टर तीन दिनों तक एक ही सीन करवाता रहा , हर बार कट बोल देता ,आख़िरकार तंग आकर उसने उसे डाटा , भावना लावो भावना ,
चूँकि वह नास्तिक था, तो भावना कहा से लाता , थक हार कर उसने डायरेक्टर से हफ्ते भर का समय माँगा इस समय वह मंदिर मस्जिद गुरूद्वारे गया ,तरह तरह से ईश्वरीय कहानिया सुनी पात्रो को जाना , सोचा ,समझा तथा अच्छे -बुरे का फर्क भी महसूस किया उसे लगा अब वह रामलीला में अपना रोल भरत को कर सकता है , परन्तु इस बात से अनभिज्ञ वह स्वयं आस्तिक हो गया है , वह अपना रोल पूरी शिद्दत से करता उसका हर सीन अच्छा बना ,उसे तमाम पैसे मिले , स्वयं राम लीला  के पात्र भरत उसके सपने मे  आये बोले हे पापी मनुष्य तुमने मेरा चरित्र  मुझसे भी अच्छी तरह से निभाया आज तुमने पहली बार पैसे के लिए अच्छा काम किया है | तुम्हारे लिए यह संभव कैसे हुआ ,जाओ आज से तुम्हारे सारे पाप नष्ट  हो जा रहे है , दूसरी सुबह वह नास्तिक पूरा आस्तिक बन मंदिर पहुंच  चुका था | 

लेखक;-आस्थावान ____रविकान्त यादव for more click ;-http://justiceleague-justice.blogspot.com/

and https://www.facebook.com/ravikantyadava


आसियाना (home)

एक अमीर  व्यक्ति थे , तमाम ऐशो आराम शानदार बंगला तमाम सुविधाये एक बार उन्हें किसी बहेलिये ने खरगोश लाकर दिया खरगोश की तमाम सेवाए होती  उसे तमाम खाना मिलता , तमाम फल मिलता उसे घूमाने फिराने को नौकर  थे ,एसी की हवा थी ,चूँकि उसे छत पर घुमाया टहलाया जाता परन्तु खरगोश की नजर हमेशा छत से सटे एक दीवार के पार जाने को सोचती , दिवार के उस पार जंगल था , परन्तु छत से कूदने की उसकी हिम्मत नहीं होती थी , छत खरगोश के लिए जरा  ऊंची थी कई दिनों तक सोचते देखते आखिर कार उसने छत से कूदने की हिम्मत जुटा ली और नौकर बेख्याल उसे छोड़ टहल रहा था , अचानक खरगोश ने छलांग मारी और छत से होते हुए दिवाल पर से झाड़ियों में जाए गिरा ,
जब तक नौकर कुछ समझता खरगोश उछलते हुए , कुलांचे भरते हुए , जंगल की तरफ दौड़  गुम, नजरो से ओझल होता गया , मानो कह रहा हो तुम्हारा आसिवाना तुम्हे ही मुबारक ,अब मै आज़ाद हु | 

लेखक;-खरगोश दर्शक ____रविकान्त यादव for more click ;-http://justiceleague-justice.blogspot.com/

and https://www.facebook.com/ravikantyadava


समझ (understanding)


एक घना हरा वट वृक्ष था , उस पर तमाम पक्षी रहते थे |  कोयल ,कौवा ,बुलबुल ,कबूतर , उल्लू , तोता , हंस  आदि तमाम पक्षियों से वट वृक्ष गुलजार था , परन्तु उन पक्षियों में एकता नहीं थी , कंही कौवे अन्य पक्षियों के अंडे खा जाते तो कभी रात में उल्लू कौवो पर हमला बोलते , तो कभी दिन में कौवे | 

सभी पक्षी जैसे तैसे अपना अपना घर परिवार जीवन बचा कर रहते थे , वे एक दूसरे से लड़ते पर  उन्हें वट वृक्ष पर रहना स्वीकार था , | वही बगल में एक सरोवर था जहा रात में तमाम भयानक जानवर भी प्यासे  पानी पीने आते थे | 

एक दिन एक साधु  भजन गाते उस रास्ते से निकला  घने हरे वृक्ष के तले  गया  तो उसकी थकान जाग गयी , वह वही सो गया तथा वृक्ष पर बसे तमाम पक्षियों के बसेरो  को देखने लगा इसी क्रम में वह रोज़ उस रास्ते से गुजरने की सोचने लगा | 

तीसरी बार वह उधर से गुजरा तो उसने देखा वृक्ष पर किसी पक्षी का आश्रय नहीं है | वे सभी उस वृक्ष पर से कही दूसरे जगह चले गए थे , साधु समझ गया था , कि पक्षी भी हमें समझ चुके है , कि अपने स्वार्थ के लिए मानव बहेलिया बन किसी भी हद तक जा सकता है | 

लेखक;- मानव ___रविकान्त यादव  for more click me ;-http://justiceleague-justice.blogspot.com/

and https://www.facebook.com/ravikantyadava